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यूपी के सरकारी स्कूलों में परीक्षा का हाल, सैकड़ों छात्रों के बीच सिर्फ एक प्रश्नपत्र, बोर्ड पर प्रश्न लिखकर हो रही परीक्षा

बच्चों की गुणवत्ता जानने के लिए परीक्षा आयोजित की गई है, मगर शासन से पैसे नहीं आये तो परीक्षा देने वाले बच्चों को प्रश्नपत्र नहीं मिल सका।

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प्रश्न पत्र

मिर्जापुर. यूपी सरकार प्राथमिक विद्यालयों में अच्छी शिक्षा देने के लिए तमाम उपाय कर रही है। बच्चों को ना सिर्फ मुफ्त शिक्षा बल्कि किताब, कॉपी, ड्रेस और मिड डे मील भी उपलब्ध करा रही है, मगर शिक्षा की हालत यह है कि यह भी किसी से छुपी नहीॆं है।

मिर्जापुर जनपद में इन दिनों कुल 2016 परिषदीय सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढने वाले एक लाख 73 हजार 98 बच्चों में ग्रेडेड निर्धारण परीक्षा चल रही है। मगर इस परीक्षा का हाल यह है कि एक कक्षा में सैकड़ों छात्रों के बीच सिर्फ एक प्रश्नपत्र दिया गया है। टीचर ब्लैक बोर्ड पर प्रश्नपत्र लिख कर बच्चों की परीक्षा करवा रहे हैं ।

बच्चों की गुणवत्ता जानने के लिए परीक्षा आयोजित की गई है, मगर शासन से पैसे नहीं आये तो परीक्षा देने वाले बच्चों को प्रश्नपत्र नहीं मिल सका। दरअसल शासन के आदेश पर सभी परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे ने क्या शिक्षा और कितनी शिक्षा ग्रहण की है, उसके लिए यूपी एसजीटी लर्निंग आउटकम आधारित स्कूल ग्रेडिंग परीक्षा प्राथमिक विद्यालयों में संपन्न कराई जा रही है, जिसमें बच्चों को आंसर शीट दी जाती है और उन्हें सही आंसर के आगे बने गोले को पेंसिल से भरना होता है। बच्चो के बीच आंशर सीट तो बांटी गयी, मगर उन्हें प्रश्नपत्र नहीं दिया गया।

पत्रिका की टीम भरुहना स्थित प्राथमिक विद्यालय में पहुंची जहां पर कुल 191 बच्चे पढ़ते हैं। यहां पर एक कक्षा में मात्र एक प्रश्नपत्र दिया गया है, जिससे चलते छात्रों और टीचर को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टीचर पहले प्रश्न को ब्लैकबोर्ड पर लिख देती थी, उसके बाद बच्चे उसका उत्तर आंसर शीट में भरते थे। स्कूल में परीक्षा करवा रही शिक्षिका शिप्रा जायसवाल और फिरदौस बेगम का कहना है कि एक कक्षा में सिर्फ एक प्रश्नपत्र दिया गया है।

वहीं इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण तिवारी का कहना है कि बजट के अभाव में इस तरह की व्यस्वथा की गई है। इसके लिए बजट कम दिया गया है। फिलहाल तो इन सरकारी स्कूलों में व्यवस्था देख कर ऐसा लग रहा है कि सरकार भले ही तमाम दावे करे मगर अभी भी जमीनी हकीकत कुछ अलग है, शिक्षा के क्षेत्र में अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है।

BY- SURESH SINGH