13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फूलन देवी ने गैंगरेप का लिया था बदला, लाइन में खड़ा कर 22 लोगों को उतारा था मौत के घाट

सोशल साइट्स पर फूलन देवी को याद कर रहे लोग, बीएचयू में फूलन देवी जिंदाबाद के लगे नारे हैदराबाद में हुए महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या को लेकर देश भर में गुस्सा

2 min read
Google source verification
Phoolan devi

फूलन देवी

मिर्जापुर. हैदराबाद में हुए महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर देश भर में गुस्सा है । सोशल साइट्स पर लोग अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं । लोग मिर्ज़ापुर से सांसद रही दस्यु सुंदरी फूलन देवी को याद कर रहे हैं, लोगों का कहना है कि वह ऐसी महिला थी जिन्होंने अपने साथ हुए बर्बरता का बदला लिया था।ऐसे दरिंदगों के साथ वही होना चाहिये। बीएचयू में भी छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान फूलन देवी जिंदाबाद के नारे वाली तख्तियां ले रखी थीं।

फूलन देवी मिर्ज़ापुर सांसद बनने से पहले पूरे देश मे अपनी जिंदगी में किये गये संघर्ष और बदला के लिए सुर्खियों में रही थी। उत्तर प्रदेश के जालौन के घूरा का पुरवा गांव निवासी फूलन देवी का जन्म बेहद गरीब मल्लाह परिवार में 10 अगस्त 1963 में हुआ। बचपन गरीबी में बीता, लेकिन फूलन कभी कमजोर नहीं हुई। 10 साल की उम्र में उनकी शादी 35 साल के बड़े आदमी के साथ कर दी गई। शादी के बाद पति ने जलील किया व फूलन देवी का रेप किया। रेप के बाद जब फूलन देवी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद ससुराल वाले फूलन देवी को मायके छोड़ आये। कुछ दिन बाद जब फूलन देवी वापस ससुराल गयी तो पति ने दूसरी से शादी कर लिया। पति व दूसरी पत्नी से फूलन देवी को घर से निकाल दिया।


ससुराल से निकाले जाने के बाद फूलन देवी की मुलाकात डाकुओं के गैंग के कुछ लोगों से हुआ। इसी मुलाकात के बाद शुरू हुआ फूलन देवी से डाकू फुलन देवी बनने से सफर। डाकूओं के गैंग में शामिल होने के बाद फूलन देवी चम्बल की मुख्य डाकुओं में से एक रही। यह गैंग यूपी और एमपी बॉर्डर पर काफी सक्रिय थे। डाकुओं के गैंग में शामिल होने के बाद फूलन देवी को डाकू विक्रम मल्लाह से प्यार हो गया। मगर बिक्रम की हत्या के बाद बीहड़ में पनाह के लिए भटक रही फूलन देवी को का ठाकुरों ने अपहरण कर लिया और बहमई गांव ले जाकर उनके साथ तीन हफ्ते तक गैंगरेप किया, किसी तरह फूलन देवी यहां से निकलकर भाग गई। इस गैंगरेप में शामिल दो लोगों को फूलन देवी ने पहचान लिया। उसके बाद 1981 में फूलन देवी एक बार फिर गांव वापस गयी, वहीं 22 ठाकुरों को गोली मार दिया। अपना बदला पूरा करने के बाद फूलन देवी फरार हो गयी।


घटना के बाद पुलिस फूलन देवी की सरगर्मी से तलाश कर रही थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी पुलिस उनको गिरफ्तार नही कर पाई। समय के साथ-साथ फूलन देवी के सदस्य भी मारे गए। जब फूलन पर पुलिस का दबाव बढ़ा तो फूलन देवी ने 1983 में सरेंडर कर दिया। 11 साल जेल में रहने के बाद फूलन देवी 1994 में जेल से बाहर आई। उसके बाद फूलन देवी ने सियासत में कदम रखा। जहां 1996 में समाजवादी पार्टी ने फूलन देवी को मिर्ज़ापुर से सांसद का प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में फूलन देवी विजयी हुई। उन्होंने दो बार जिला का संसद में प्रतिनिधित्व किया। हालांकि सांसद रहते 2001 में फूलन देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी ।

BY- SURESH SINGH