
पिता की मौत के बाद खेती करके पढ़ाई के लिए पैसे देती थी मां, अब IAS बनकर बेटे ने पूरा किया सपना
मिर्ज़ापुर. प्रशांत मिश्रा जिसने IAS की परीक्षा में 714 वीं रैंक हांसिल की है। आज उसके घर में खुशियों के बादल उमड़ें हैं। लेकिन, प्रशांत ने यह सफलता यूं ही नहीं हांसिल की। इसके पीछे उनकी मां विद्या देवी और बड़े भाई संतोष मिश्रा का अहम योगदान है। चार साल की उम्र में प्रशांत के किसान पिता ने जब इस दुनिया को अलविदा कह दिया तो मां के सामने दुखों पहाड़ टूट पड़ा। किसानी से घर का खर्चा चलाने वाली मां के सामने अब बेटे को काबिल बनाने की जिम्मेदारी थी। मां के संघर्षों को देखकर प्रशांत के मन में कुछ अच्छा करने की भावना ने जन्म लिया। पिछड़े इलाके के प्रशांत ने स्कूल की पढ़ाई करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए घर से दूर जाना पड़ा। इन सब में पूरे परिवार ने इनका साथ दिया। बड़े भाई ने पिता भूमिका निभाई। प्रशांत जब फोन पर मां से बात करते तो मां समझाती, बेटा हिम्मत मत हरना। बता दें कि, परिवार का सपना पूरा करने के लिए प्रशांत ने दो-दो अच्छी सरकारी नौकरियां भी छोड़ दी।
वो कहते हैं ना, अगर हौसला हो तो मंजिल हांसिल करने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसी ही सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया प्रशांत कुमार मिश्रा ने। प्रदेश के सबसे पिछड़े इलाकों में गिने जाने वाले हालिया ब्लॉक के पंडितपुर गांव के रहने वाले प्रशांत कुमार मिश्रा यूपीएससी के परीक्षा में 714 वी रैंक हासिल कर IAS बने हैं।
प्रशांत ने 28 वर्ष की उम्र में यह सफलता तीसरे प्रयास में हासिल किया। किसान परिवार से संबंध रखने वाले प्रशांत मिश्रा के पिता मुन्ना मिश्रा किसान थे। मां विद्या देवी गांव में ही खेतीबारी का काम करती हैं। चार भाई और एक बहन में प्रशांत सबसे छोटे है। शुरू से उनकी पूरी शिक्षा दीक्षा गांव से हुई है। गांव के पास रतेस चौराहे पर स्थित आदर्श दल बहादुर सिंह जूनियर विद्यालय से कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा हांसिल करने के बाद वह गोपाल इंटर कॉलेज कोरवा में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा पास की। इसके बाद बीटेक की पढ़ाई के लिए इंदौर चले गए।
जहां पर बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही वह सिविल सर्विस कि तैयारी करने लगे। इस बीच रेलवे में गुजरात के लिए उनका चयन सीनियर सेक्सन ऑफिसर के पद पर हुआ। मगर आईएएस बनने के अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी ज्वाइन नहीं किया और तैयारी में लगे रहे। इसी बीच दुबारा रेलवे विभाग की परीक्षा पास कर उनका चयन रेलवे कामर्सियल ऑपरेशन अधिकारी के पद पर मुम्बई में हुआ। यह नौकरी भी उन्होंने छोड़ दिया।
इससे पहले यूपीएसी 2016 की प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं हांसिल हुई। मगर वह हौसला नहीं हारे तीसरे प्रयास में 2017 में सफलता हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। इंदौर से पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने सफलता के लिए सारा श्रेय पिता और मां और बड़े भाई संतोष मिश्रा को दिया। उनका कहना था कि, बड़े भाई ने हमेशा हौसला बढ़ाया उनके लिए हर फैसलो में साथ दिया। असमय पिता को खोने वाले प्रशांत के लिए उनके बड़े भाई संतोष मिश्रा ने बड़ी भूमिका निभाई। पेशे से कोटेदार और गांव में खेती से उन्होंने अपने सभी भाइयों को पढ़ाया। पत्रिका से बात करते हुए संतोष मिश्रा का कहना था कि, हमने तो अभिभावक की भूमिका निभाई पढ़ाई में मेहनत तो उन्होंने ही किया। फिलहाल प्रशांत ने परीक्षा परिणाम के बाद जैसे ही सफलता की जानकारी अपने परिजनों को दिया उसके बाद से ही घर में जश्न का माहौल है।
BY सुरेश सिंह
Published on:
28 Apr 2018 01:55 pm
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