
jila karagar
मिर्जापुर. जिला कारागार में बंद कैदियों को हुनरमंद बनाने के लिए चलाए जाने वाले पायलट योजना के तहत जेल के अंदर दरी बुनाई प्रशिक्षण केन्द्र बनाया गया है। कैदियों द्वारा बनाया गया दरी विदेशी बाज़ार में बिकेगा। जेल में बुनी इस कालीन को जर्मनी भेजा जाएगा, इसमें जेल में सजा काट रहे कैदी प्रशिक्षण प्राप्त कर दरी की बुनाई करके दो हजार रुपया मासिक तक कमा सकते है।
अपराध की दुनिया में कदम रखकर जेल पहुंचे कैदियों को सजा काट कर रिहा होने के बाद वह अपने पैरों पर खड़े हो कर समाज मे इज्जत की जिंदगी जी सकें, इसके लिए मिर्ज़ापुर जेल में कैदियों को सजा के साथ हुनरमंद बनाने की भी व्यवस्था की गयी है। जेल प्रशासन और शहर के नामी कालीन व्यवसायी विक्रम कारपेट की पहल से जेल के अंदर कालीन दरी प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है। इसके लिए विक्रम कार्पेट कैदियों को कच्चा माल उपलब्ध करा रहा है तो कैदी अपनी मेहनत से उसे उम्दा क्वालिटी की दरी बना रहे है । वह कमाई भी कर रहे हैं। अभी जिला कारागार में चार यूनिट बुनाई प्रक्षिक्षण केंद्र संचालित है जिसे छह यूनिट करने पर कार्य किया जा रहा है ।
जेल अधीक्षक, जिला कारागार मिर्ज़ापुर अनिल राय का कहना है कि इसका उद्देश्य जेल से छूटने के बाद कैदियों को इसका लाभ मिलेगा और वह खुद बुनाई करके परिवार का जीवकोपार्जन कर सकते हैं। वहीं जेल में कैदियों द्वारा बुनी गयी दरी विदेश की धरती जर्मनी भेजा जाएगा इसके विदेशी खरीदार भी जेल में भ्रमण करने के साथ सभी दरी खरीदने का समझौता किया है। इस पायलट परियोजना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले विक्रम कार्पेट के मालिक ऋषभ जैन का कहना है कि इससे कैदियों को अपने समय का सदुपयोग होने के साथ ही आमदनी होगी, साथ ही साथ वह अपराध की दुनिया से भी दूर होंगे । फिलहाल जिला कारागार में कैदियों को हुनरमंद बनाने के प्रयास को समाजसेवी भी एक अच्छी पहल मान रहे हैं। उनका मानना है कि जेल में अपराधी के रूप में जाकर हस्तकला का ज्ञान पाकर निकलने वाला व्यक्ति सामान्य जीवन जीते हुए अपने परिवार का पालन पोषण करने में सक्षम होगा ।
BY- Suresh Singh
Published on:
28 Jun 2019 09:17 am
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