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ये है भूतों का मेला, जहां हजारों प्रेत, डायन चुड़ैल और पिशाच आते हैं VIDEO

कहा जाता है कि इस मेले में पहुंचने वालों को प्रेती बाधा से मिलती है मुक्ति

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The ghosts fair

भूतों का मेला

सुरेश सिंह की रिपोर्ट...

मिर्ज़ापुर. आपने मेले में इंसानों की भीड़ तो बहुत देखा होगी। पर मिर्जापुर जिले में अहरौरा में भूतों का मेला लगता है। इस मेले में भूत, चुड़ैल और डायनों का जमावड़ा लगता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले को बेचूबीर मेला के नाम से जाना जाता है। आज हम तकनीकी और सूचना क्रांति के दौर में भले ही अन्तरिक्ष और चाँद पर घर बसाने की सोच रहे हों। लेकिन अहरौरा के भूत मेले में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ये बता रही है कि शायद आज भी हम प्रेती बाधा और भटकती आत्माओं के चंगुल में हकीकत न सही पर संदेह में तो फंसे ही हुए हैं।

हजारों लोग मेले में पहुंचे
तीन दिवसीय चलने वाले इस मेले का आज दूसरा दिन है। यह मेला शनिवार से शुरू हुआ। जिसमें मिर्जापुर समेत आस-पास के हजारों लोग हिस्सा ले रहे हैं। जो कि सोमवार तक चलेगा। ऐसी मान्यता है कि इस मेले में शामिल होने वाले लोगों को कथित तौर से भूत ,डायन और चुडैल से मुक्ति मिल जाती है। कहा प्रेती बाधा से परेशान हजारों लोगों के यहां आने के बाद उनका संकट दूर हो जाता है।

ये है मेले की मान्यता
ऐसा कहा जाता है कि अब से तकरीबन चार सौ साल पहले भगवान शंकर के परम भक्त बेचूबीर भगवान शंकर के साधना में हमेशा लीन रहते थे परम योद्धा लोरिक इनका परम भक्त था। एक बार लोरिक के साथ बेचूबीर इस घनघोर जंगलमें ठहरे थे भगवान शिव की आराधना में लीन थे तभी उनके ऊपर एक शेर ने हमला कर दिया तीन दिनों तक चले इस युद्ध में बेचूबीर ने अपने प्राण त्याग दिये और उसी जगह पर बेचूबीर की समाधि बन गयी। तभी से यहाँ मेला लगता है। अब इनकी छठी पीढ़ी मेला आयोजन का कामकाज देखती है।

बरहिया देवी के दर्शन बिना नहीं पूरी होती मनोकामना
बेचूबीर की मौत के बाद उनकी पत्नी बरही कि भी मौत हो गयी। मौत के बाद बेचूबीर की समाधि से थोड़ी दूरी पर उनकी पत्नी बरहिया माई कि समाधि है मान्यता है कि जो बेचूबीर की समाधि पर दर्शन करेगा उसकी मनोकामना तभी पूरी होगी जब वह बरहिया माई के समाधि का भी दर्शन करेगा। दोनों जगह मेला तीन दिनों तक चलता रहता है।

खास यंत्र मंजरी भी बनाई जाती है
मान्यता है कि बेचूबीर की समाधि पर पहुंचने से पहले दो किलोमीटर पहले ही भस्सी नदी में लोग स्नान करते है। इसके बाद अपने कपड़ो को वही छोड़ कर समाधि कि तरफ़ बढ़ते है। समाधि पर पहुंचकर समाधि का दर्शन पूजन करते है। प्रेत बाधा से प्रभावित लोग समाधि के पास ही बने मैदान में बैठ कर झूमते रहते हैं। मेला के तीसरे दिन मेला समाप्ति के लिए खास यंत्र मंजरी बजाई जाती है। यह भी कहा जाता है कि निःसन्तान दंपति भी संतान प्राप्ती के लिए मेले में आते हैं।

दिखता है इंसान के शरीर पर प्रेती आत्माओं का कब्जा

यहां आने वाले लोगों को देखकर एक बारगी तो हर कोई डर जाता है कि भूत आखिर इन सब पर कहां से आ गये। कोई कहता है उनके सर पे पड़ोसी ने भूत बैठा दिया है , तो किसी को सन्नाटे में भूत ने पकड़ लिया है। किसी पर श्मशान के पास से गुजरते वक़्त भूत सवार हो गया है। यहाँ आ कर बेचूबीर का आशीर्बाद लेकर लोग ठीक होते है। अंधविश्वास के इस मेले में फरियादी तो इंसान होता है लेकिन उस पर किसी भूत , चुडैल , डायन जैसे लोगो का कब्जा होता है। पीड़ित लोग भी खुत को भूत बताते हैं। प्रेत बताते हैं और बेसुध होकर अनेकों तरह के कारनामें करते दिखते हैं।

यहां आये हुए लोग कहते हैं कि इस बाधा से मुक्ति सिर्फ बेचूबीर बाबा ही दिला सकते है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मेले कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्थानीय अहरौरा थाने कि पुलिस के साथ पीएसी भी पुलिस भी लगाई गयी है। फिलहाल तो भूत -प्रेत जैसे अंधविश्वास के पीछे एक गहरी सामाजिक धारणा होती है। मगर आज भी यह समाज मे जड़े जमाये हुए।