
Ganga River
मिर्जापुर. एक तरफ भीषण गर्मी से पूरा उत्तर भारत परेशान है वहीं दूसरी तरफ इस प्रचंड गर्मी से ताल- तलैया भी सूखे पड़े हैं। वहीं जीवन दायिनी मां गंगा भी तट छोड़कर काफी दूर चली गई हैं। गंगा के जलस्तर में अचानक कमी की वजह से मिर्ज़ापुर में गंगा का दामन रेत से भर चुका है। गंगा का पानी एक नाले में तब्दील होने के कगार पर है। गंगा को प्रदूषण मुक्त व निर्मल करने की सारी सरकारी परियोजनाओं का असर धरातल पर होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। इलाहाबाद से चलकर गंगा मिर्जापुर में पहुंचती है। यहीं पर विंध्याचल में पहली बार वह विंध्य पर्वत को स्पर्श करती है। जिसका अपना पौराणिक महत्व है। मगर इन दिनों गंगा के जलस्तर में कमी की वजह से गंगा घाट लगभग 200 मीटर से 300 मीटर दूर हो गए हैं। जहां अथाह जल होता था। आज वहां रेत की मोटी परत जम गई है।
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हालत यह है कि शहर में गंगा नदी पर बने शास्त्री सेतु के पिलर पानी से बाहर रेत में दिखाई पड़ रहे है। इसके पास रेत की धूल उड़ रही है।सरकार के तमाम परियोजना के बाद भी व नमामि गंगे परियोजना कें पश्चात भी कुछ नहीं बदला। दिन पर दिन गंगा नदी बदहाल होती चली जा रही है, हालांकि इसका कारण भीषण गर्मी और टेहरी बांध से पानी की कमी बारिश न होने की वजह मान रहा है। जिसके कारण आज गंगा में रेत ही रेत फैला दिखाई दे रहा है। पिछले कई सालों से गंगा में स्नान करने वाले भक्त भी गंगा कि इस दुर्दशा से बहुत ही दुखी है। मुन्नू मिश्रा का कहना है कि जो पानी रूक गया है उसे लगातार बहने दें। गंगा को नाले में परिवर्तित न होने दें। वही जिनका रोजगार गंगा से जुड़ा है वह भी अपनी रोजगार को ले कर चिंतित है। स्थानीय मल्लाह सुनील का कहना है कि उनके परिवार की आजीविका गंगा से ही जुड़ी हुई है। अगर गंगा सुख गई तो हम सब कहा जायेगे। फिलहाल अगर ऐसे रहा तो आने वाले समय मे गंगा नदी का नाम ही बचा रह जायेगा।कही गंगा नाले में तब्दील हो कर न राह जाएगी।
BY-Suresh Singh
Published on:
13 Jun 2019 02:18 pm
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