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1950 – लागू हुआ भारत का संविधान, पहली परेड और महिलाओं को मिला वोट का अधिकार

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है

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Sunil Sharma

Aug 09, 2017

1950 Prade Image Anil

1950 Prade Image Anil

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन एक गणतंत्र देश के रूप में भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल में भारत में संविधान लागू होते ही कानून का राज आया जिसमें देशहित, जनता की भलाई और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े कई कार्य तीव्रगति से प्रारंभ हुए। गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व भी है जिसे हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है और इस दिन राष्ट्रीय अवकाश भी होता है।

गणतंत्र होने के साथ ही देश में एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली की शुरुआत हुई। 26 जनवरी 1950 को ही देश की पहली परेड की शुरुआत हुई, वहीं महिलाओं को भी सरकार चुनने के लिए मताधिकार भी मिला। इस दिन शुरू ये ऐसे कार्य थे भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र बनने में मील का पत्थर साबित हुए। देश के संविधान को लागू हुए आज 71 साल हो चुके हैं और इसी कड़ी में 71 Years 71 Stories के माध्यम से हम आपको 1950 में शुरू हुए प्रमुख कार्यों के बारे में बता रहे हैं जो देश की तरक्की में बहुत ही सार्थक साबित हुए।

गणतंत्र दिवस की पहली परेड यहां हुई शुरू

गणतंत्र दिवस की पहली परेड 26 जनवरी, 1950 को इर्विन स्टेडियम में हुई थी जिसे आज नेशनल स्टेडियम कहा जाता है। हालांकि अब यह परेड राजपथ पर होती है। इसी दिन देश के पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने 26 जनवरी बृहस्पतिवार के दिन सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। इसी के साथ ही डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारतीय गणतंत्र के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई जिसमें उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई। आज भी राष्ट्रपति को तोपों की सलामी की यह परंपरा कायम है।

सलामी के बाद परेड की शुरुआत हुई जिसे देखने के लिए स्टेडियम में 1500 लोग मौजूद थे। उसके बाद राष्ट्रपति ने तिरंगा झंडा फहराकर परेड की सलामी ली। इस परेड में सशस्त्र सेना के तीनों बलों ने भाग लिया था जिनमें नौसेना, इन्फेंट्री, कैवेलेरी रेजीमेंट, सर्विसेज रेजीमेंट के अलावा सेना के सात बैंड भी शामिल थे। भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो बने थे।

भारत में महिलाओं को मिला मताधिकार

हालांकि भारत में महिलाओं को बराबरी का दर्जा प्राचीन काल में भी था, लेकिन समय के अनुसार अलग—अलग संस्कृतियों वाले विदेशी आक्रांताओं की वजह से यहां की महिलाओं की सामाजिक व्यवस्था छिन्न—भिन्न हो गई थी, लेकिन आजादी के बाद भारतीय संविधान में महिलाओं के गौरवमयी स्थान को बनाए रखते हुए उन्हें पुरुषों के साथ समान मताधिकार और चुनाव में खड़े होने का अधिकार दिया गया।

समान मताधिकार से महिलाओं को मिली मजबूती

भारतीय संविधान में शुरुआत से ही महिलाओं को पुरूषों के समान वोट देने और चुनाव लड़ने के अधिकार
का ही नतीजा है कि आज उनकी उनकी स्थिति राजनैतिक, व्यवसाय, सामाजिक, शैक्षिक और नैतिक आधार पर दुनिया के कई से काफी ज्यादा प्रबल है। आज भारतीय महिलाएं न सिर्फ भारत की सशस्त्र सेनाओं से लेकर पुलिस में अपनी सेवाएं दे रही हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दुनिया की टॉप कंपनियों में उच्च पदों पर आसीन होकर देश का मान बढ़ा रही हैं।"


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