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1961 – गोवा का हुआ भारत में विलय

पुर्तगालियों ने गोवा पर लगभग 450 सालों तक शासन किया था लेकिन 19 दिसंबर 1961 को गोवा को भारत में विलय हो गया था

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Sunil Sharma

Aug 10, 2017

1961 - goa acquisition

1961 - goa acquisition

1947 में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने के बाद भारत को अपने एक छोटे राज्य गोवा को हासिल करने के लिए सन् 1961 में पुर्तगालियों से लड़ाई लड़नी पड़ी थी। बता दें क्षेत्रफल के हिसाब से गोवा भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चौथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने खूबसूरत समुंदर के किनारों और मशहूर स्थापत्य के लिये जाना जाता है। गोवा पहले पुर्तगाल का एक उपनिवेश था।

पुर्तगालियों ने गोवा पर लगभग 450 सालों तक शासन किया था लेकिन 19 दिसंबर 1961 को गोवा को भारत में विलय हो गया था। इसी की याद में 'गोवा मुक्ति दिवस' प्रति वर्ष '19 दिसम्बर' को मनाया जाता है।

18 दिसंबर 1961 को ऑपरेशन विजय की शुरुआत

ब्रिटिश और फ्रांस के सभी औपनिवेशिक अधिकारों के खत्म होने के बाद भी भारतीय उपमहाद्वीप गोवा, दमन और दीव में पुर्तगालियों का शासन था। भारत सरकार की बार बार बातचीत की मांग को पुर्तगाली ठुकरा रहे थे। जिसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय के तहत सेना की छोटी टुकड़ी भेजी। 18 दिसंबर 1961 के दिन ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने गोवा, दमन और दीव पर चढ़ाई कर दी।

भारतीय सैनिकों की टुकड़ी ने गोवा के बॉर्डर में प्रवेश किया। 36 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक जमीनी, समुद्री और हवाई हमले हुए। इसके बाद पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के भारतीय सेना के समक्ष 19 दिसंबर को आत्मसमर्पण किया।

पुर्तगाल के गर्वनर ने भारतीय सेना प्रमुख के आगे किया था सरेंडर

हालांकि पुर्तगाली सेना को भी यह आदेश मिला था कि या तो वह दुश्मन को शिकस्त दे या फिर मौत को गले लगा ले लेकिन भारतीय सेना के सामने पुर्तगाली सेना कमजोर साबित हुई। भारत ने अंततः पुर्तगाल के अधीन रहे इस क्षेत्र को अपनी सीमा में मिला लिया। पुर्तगाल के गवर्नर जनरल वसालो इ सिल्वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन थापर के सामने सरेंडर किया। इस तरह 19 दिंसबर 1961 को गोवा आधिकारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गया।