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1974 – स्माइलिंग बुद्धा ने दुनिया को मनाया भारत का लोहा

सन् 1974 में राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण करके दुनिया को सकते में ला दिया

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जयपुर

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Sunil Sharma

Aug 11, 2017

1974 - first indian nuclear test

1974 - first indian nuclear test

सन् 1974, तारीख 18 मर्इ, शनिवार के दिन राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण करके दुनिया को सकते में ला दिया। इस सफल परमाणु शक्ति परीक्षण के साथ ही भारत भी दुनिया के ताकतवर देशों में शुमार हो गया। बुद्व पूर्णिमा के दिन किए गए इस परीक्षण को कोड नाम रखा गया था स्माइलिंग बुद्धा।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दी हरी झंडी

1974 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के पहले परमाणु परीक्षण के लिए हरी झंडी दे दी। परीक्षण से पूरी दुनिया चौंक उठी, क्योंकि सुरक्षा परिषद में बैठी दुनिया की पांच महाशक्तियों से इतर भारत परमाणु शक्ति बनने वाला पहला देश बन चुका था। हलांकि उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और यह परीक्षण भारत को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है।

देश के पहले परमाणु शक्ति परीक्षण में राजा रमन्ना के नेतृत्व में भारत के मेधावी परमाणु वैज्ञानिकों पीके आयंगर, राजगोपाल चिदंबरम, नागपत्तानम सांबशिवा वेंकटेशन, वामन दत्तात्रेय पंट्टवर्धन, होमी एन. सेठना आदि की टीम ने अपनी पूरी मेधा झोंक दी। इस टीम के राजगोपाल चिदंबरम बाद में एपीजे अब्दुल कलाम के साथ पोखरण-2 के सूत्रधारों में थे।

भारत के परमाणु परीक्षण की पूरी दुनिया में प्रतिक्रिया हुई। पाकिस्तान ने इसे धमकी भरी कार्रवाई करार दिया तो कुछ अन्य देशों ने परमाणु होड़ बढ़ाने वाला बताया।

परमाणु परीक्षण का है लंबा सफर

भारत के परमाणु शक्ति संपन्न होने की दिशा में काम तो वर्ष 1945 में ही शुरू हो गया था, जब होमी जहांगीर भाभा ने इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की नींव रखी। लेकिन सही मायनों में इस दिशा में भारत की सक्रियता 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद बढ़ी।

इस युद्ध में भारत को शर्मनाक तरीके से अपने कई इलाके चीन के हाथों गंवाने पड़े थे। इसके बाद 1964 में चीन ने परमाणु परीक्षण कर महाद्वीप में अपनी धौंसपंट्टी और तेज कर दी। दुश्मन पड़ोसी की ये हरकतें भारत को चिंतित और विचलित कर देने वाली थीं। लिहाजा सरकार के निर्देश पर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने प्लूटोनियम व अन्य बम उपकरण विकसित करने की दिशा में सोचना शुरू किया।


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