
1977 - indira gandhi sanjay gandhi
देश में राजनीतिक रूप से 1977 का वर्ष बहुत ही बदलाव वाला था। इस वर्ष देश को पहली बार गैरकांग्रेसी सरकार मिली। जिसके मुखिया के रूप में मोरारजी देसाई ने पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि यह सरकार बहुमत से इंदिरा गांधी को हराकर बनाई गई थी फिर भी आपसी खींचतान के चलते यह सरकार ज्यादा नहीं चल पाई और जल्दी ही चुनाव हुए। इन चुनावों में इंदिरा गांधी भारी बहुमत से जीतकर एक बार फिर प्रधानमंत्री बनी। हालांकि यह गठबंधन वाली सरकार ज्यादा नहीं चल पाई लेकिन इसने देश की पार्टियों के सामने महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने का रास्ता रखा जिसके आधार पर बाद में देश में कई सरकारें गिराई और बनाई गई।
1977 में हटाई गई थी इमरजेंसी
इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए 1975 में पूरे देश में इमरजेंसी (आपातकाल) लागू कर दी थी। इस आपातकाल को देश के इतिहास में काले अध्याय के रुप में जाना जाता है। हालांकि इस दौरान देश में कई अन्य सुधार भी हुए थे। वर्ष 1977 में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी हटाई और चुनाव करवाएं। इन चुनावों में इंदिरा गांधी को भारी हार का सामना करना पड़ा और देश को पहली कांग्रेस मुक्त सरकार मिली जिसमें सभी पार्टियों ने कांग्रेस तथा इंदिरा गांधी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा था। मोरारजी देसाई देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
बॉलीवुड ने लिखी नई इबारत
हिन्दी सिनेमा में अमर कही जाने वाली फिल्म शोले 1975 में रिलीज हुई थी। इसने हिन्दी फिल्मों को एक्शन फिल्में बनाने के लिए प्रेरित किया। इसी के असर पर बॉलीवुड में एक्शन फिल्में बनने लगी जो 1977 में आकर चरम पर पहुंच गई। 1977 के वर्ष में अगर 'किनारा' और 'शक' मूवी को छोड़ दें तो उस वर्ष एक्शन फिल्में भी कामयाब रही जिसके नक्शेकदम पर चलते हुए अस्सी और नब्बे के दशक में मारधाड़ वाली फिल्मों की भरमार हो गई। हालांकि नब्बे के दशक में रोमानी फिल्मों ने इस ट्रेंड को बदलने का प्रयास किया जो कुछ हद तक सफल भी रहा।
Published on:
12 Aug 2017 08:13 am
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