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सीमा मुद्दों पर सेना की 6 दिनों का सम्मेलन, चीन-पाकिस्तान पर होगी चर्चा

सोमवार से शुरु हो रहे सम्मेलन में थल सेना प्रमुख चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा मुद्दे समेत अन्य चुनौतियों पर विचार मंथन करेंगे।

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general bipin rawat

नई दिल्ली । सीमा सुरक्षा के मद्देनजर थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत सोमवार से 6 दिनों के लिए समीक्षा सम्मेलन करेंगे। इस सम्मेलन में थल सेना प्रमुख बिपिन रावत चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा मुद्दे समेत अन्य चुनौतियों पर विचार मंथन करेंगे।
आपको बता दें कि इस सम्मेलन से पहले जनरल बिपिन रावत ने एक संबोधन में कश्मीर मामले पर बोलते हुए कहा 'कश्मीर में कुछ नौजवान ऐसे हैं जो भटक गए हैं। इनका रेडिक्लाइजेशन हो गया है। लेकिन वह समय दूर नहीं हो जब उन्हें यकीन हो जाएगा की बंदूक से न फौज अपना मकसद पूरा कर सकेगी और न ही आतंकवादी। अमन और शांति का रास्ता हमें मिलकर निकालना है।'

बुनयादी विकास कार्यों को बढ़ावा देने पर चर्चा

आपको बता दें कि थल सेना के अधिकारियों के बताया कि इस 6 दिनों के सम्मेलन की अध्यक्षता जनरल बिपिन रावत करेंगे। इस सम्मेलन के दौरान चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा की जाएगी। साथ ही कश्मीर मामले पर भी गहन चिंतन किया जाएगा। थल सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस सम्मेलन के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है जिसमें भविष्य में सुरक्षा खतरों को कम करना और अपने प्रतिद्वंदी के खिलाफ सामरिक क्षमता को बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण उत्तरी सीमा में बुनियादी विकास ढांचे का विकास करना, रणनीतिक रेल लाइन की समीक्षा करना और गोला-बारूद की जरूरतों को पूरा करने और कश्मीर में शांति बहाली की प्रक्रिया को तेज करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

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चीन से सटी सीमा को सुरक्षित करने पर जोर

गौरतलब है कि चीन से लगी करीब 4 हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर सेना के लिए बुनियादी विकास कार्य को बढ़ावा देना जरूरी है। क्योंकि बीते साल डोकलाम विवाद को लेकर 73 दिनों तक दोनों देशों के बीच गतिरोध बना रहा था। हालांकि भारत ने इस घटना के बाद सबक लेते हुए सीमा पर सैनिकों की संख्या के साथ गश्त बढ़ा दी है।
बता दें कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थितियों पर भी चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के पहले तीन दिन में सीमा मुद्दों पर चर्चा होगी तो वहीं अंतिम तीन दिन विशेष मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

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