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29 साल बाद भी नहीं सिद्ध हुए आरोप, रिहा हो गए 29 आरोप

19 जनवरी, 1987 को चंपानगर के मनसकामनानाथ चौक पर डीएसपी को उनकी सरकारी जीप में आग लगाकर जिंदा जला दिया गया था

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Rakesh Mishra

Apr 06, 2016

sukhdev mehra murder case

sukhdev mehra murder case

भागलपुर। चंपानगर में डीएसपी सुखदेव मेहरा को जिंदा जला देने के मामले में एडीजे प्रथम जनार्दन त्रिपाठी का अदालत ने सभी 29 आरोपियों को रिहा कर दिया है। यह फैसला 29 साल बाद आया है। वहीं अदालत ने अभियोजन पक्ष की शिथिलता पर हैरानी जताई है। वहीं अदालत में जिरह के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि गंभीर मामला होने के बावजूद भी 29 साल में मात्र पांच लोगों की ही गवाही हो सकी। मामले के सूचक तत्कालीन थानाध्यक्ष केबी लाल ने भी गवाही नहीं दी और जिन लोगों ने गवाही दी उन्होंने आरोपियों को पहचाना ही नहीं।

बता दें कि 19 जनवरी, 1987 को चंपानगर के मनसकामनानाथ चौक पर डीएसपी को उनकी सरकारी जीप में आग लगाकर जिंदा जला दिया गया था। इस दिन बुनकरों ने पावरलूम वीवर्स एसोसिएशन के बैनर तले विशाल रैली निकाली थी। विधि व्यवस्था की कमान वहां के तत्कालीन डीएसपी सुखदेव मेहरा संभाले हुए थे। मेहरा ने मनसकामनानाथ चौक पर आंदोलनकारी भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित भीड़ नहीं रुकी। भीड़ ने उन पर बोतल और पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें मेहरा और एएसआई जख्मी हो गए। इसके बाद वे पास ही एक दुकान में छिप गई। वहीं गुस्साई भीड़ ने सरकारी जीप को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने मेहरा को जलती जीप में फेंक दिया। इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष केके सिंह ने फायरिंग का आदेश दे दिया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

पुलिस ने इस मामले में 26 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी। वहीं मामले में 88 लोगों के नाम चिन्हित किए गए थे। इसके बाद ट्रायल में 29 लोगों को आरोपी माना गया था। वहीं सिधुआ नामक व्यक्ति भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था। बताया जाता है कि उसने ही डीएसपी को खींचकर जीप में फेंका था। पुलिस को उसके पास से डीएसपी की अंगूठी भी मिली थी। कुछ साल पहले उसकी मौत हो गई।

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