
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के योगी सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी जाएगी चुनौती
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदल दिया है, जिसका विरोध भी हो रहा है। योगी सरकार के इस फैसले को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी जाने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट के अध्यक्ष शाहिद अली योगी सरकार के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
'ऐतिहासिक नाम बदला नहीं जा सकता'
शाहिद अली ने जानकारी देते हुए बताया है कि इलाहाबाद का नाम बदलना भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश अधिसूचना 27.09.1975 का उल्लंघन है। इस अधिसूचना के अनुसार किसी भी शहर या सड़क वगैरह का नाम अगर वह ऐतिहासिक नाम है या इतिहास से उसका कोई भी संबंध है तो उसे बदला नहीं जा सकता। नामों के साथ छेड़छाड़ भी नहीं की जा सकती है।
अदालत जाने की ये हैं वजह
उन्होंने कोर्ट जाने के अपने फैसले पर तर्क देते हुए बताया कि जब भारत सरकार की गाइडलाइन हैं तो आप ने नाम कैसे बदल दिया। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 (एफ) में यह बताया गया है कि यह हमारी देश की मिली जुली संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित और मूल्यवान रखने के लिए हर नागरिक का कर्तव्य होगा। इसी कर्तव्य को पूरा करने के लिए हमें अदालत का रूख करना पड़ेगा। शाहिद अली ने कहा कि गाइडलाइन कहती हैं कि इसके अलावा, उन नामों को बदलने के लिए जो ऐतिहासिक नहीं हैं, कम से कम 45 दिन का समय लेते हैं। बता दें कि शाहिद अली इससे पहले भी औरंगजेब रोड का नाम बदलने पर कोर्ट गए, हालांकि उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। 2015 में दिल्ली नगर निगम ने पहले मुगल सल्तनत के बादशाह औरंगजेब के नाम से प्रचलित औरंगजेब रोड का नाम बदला और उसे पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक एपीजे कलाम के नाम पर कर दिया था।
Published on:
17 Oct 2018 02:19 pm
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