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ये परमाणु संपन्न देश हैं दुनिया के लिए खतरा, क्या है परमाणु हथियारों की राजनीति

परमाणु हथियारों की राजनीति में परमाणु अप्रसार संधि एक मुख्य बिंदु है। 1 जुलाई 1968 से अब तक इस संधि पर दुनिया के 190 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं।

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नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की होड़ लगातार बढ़ती जा रही है दुनिया का हर देश परमाणु शक्ति संपन्न होना चाहता है। जबकि परमाणु हथियारों के विनाशकारी प्रकोप से सभी परिचित हैं। आखिर क्या है परमाणु हथियारों की राजनीति? क्या सभी देशों के इस होड़ में शामिल होने से दुनिया में कभी संतुलन बन पाएगा। जिस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोशिमा नागासाकी में मानवीय त्रासदी सामने आयी उसने दुनिया की आंखें खोलने का काम किया। लेकिन उस बड़े हादसे के बाद भी यह होड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के नौ देशों के पास 16300 परमाणु बम हैं। जो पूरी दुनिया को खत्म करने के लिए काफी हैं। अभी हाल ही में ईरान ने परमाणु परीक्षण किया है और नॉर्थ कोरिया के परमाणु परीक्षण लगातार जारी हैं।

यह है परमाणु हथियारों की विश्व राजनीति
परमाणु हथियारों की राजनीति में परमाणु अप्रसार संधि (नॉन प्रॉलिफरेशन ट्रीटी) एक मुख्य बिंदु है। इसे एनपीटी के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व भर में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना है। 1 जुलाई 1968 से इस समझौते पर हस्ताक्षर होना शुरू हुआ। अभी तक इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके देशों की संख्या 190 है। जिसमें पांच देशों के पास परमाणु हथियार हैं। ये देश - अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन हैं। 1968 में लागू हुई संधि के बावजूद अमरीका, रूस और चीन अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाते रहे हैं।

ये देश हैं संधि से बाहर
भारत समेत इजरायल, पाकिस्तान द. सूडान और उत्तरी कोरिया ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके अलग-अलग कारण हैं।
एनपीटी के तहत भारत को परमाणु संपन्न देश की मान्यता नहीं दी गई है। जो इसके दोहरे मापदंड को प्रदर्शित करता है। इस संधि का प्रस्ताव आयरलैंड ने रखा था लेकिन इस पर सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाला देश फिनलैंड है। इस संधि के तहत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र उसे ही माना गया है जिसने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु हथियारों का निर्माण और परीक्षण कर लिया हो। इसी आधार पर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दर्जा प्राप्त नहीं है। क्योंकि भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया था। नॉर्थ कोरिया ने भी इस सन्धि पर हस्ताक्षर किए फिर इसका उलंघन कर इससे बाहर आ गया।

इन देशों के हाथ में परमाणु हथियार होना है खतरनाक
नॉर्थ कोरिया, ईरान, इराक, पाकिस्तान, इजराइल सहित कई देशों के पास परमाणु हथियार होना दुनिया के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है। जब भी कोई देश परमाणु परीक्षण करता है तो वह इसके पीछे एक ही तर्क देता है कि उसे अपने पड़ोसी देश से खतरा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा परमाणु हथियारों के अप्रसार को रोकने के लिए बीते जुलाई महीने में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ी पहली वैश्विक संधि की स्वीकृति के लिए संयुक्त राष्ट्र में 122 से अधिक देशों ने मतदान किया था।

हालांकि, भारत, अमरीका, चीन और पाकिस्तान सहित अन्य परमाणु क्षमता सम्पन्न देशों ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने की खातिर कानूनी तौर पर बाध्यकारी व्यवस्था के लिए हुई वार्ताओं का बहिष्कार किया था। दुनिया के ज्यादा ताकतवर देश अमरीका, रूस, चीन, फ्रांस एवं अन्य उन देशों के परमाणु शक्ति संपन्न होने को खतरा मानते हैं जहां सत्ता पर कट्टर पंथी और तानाशाह शासक सत्ता पर काबिज हैं। लेकिन ये देश अंतरराष्ट्रीय नियम को दरकिनार करते हुए लगातार परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। नॉर्थ कोरिया और ईरान इसके ताजा उदाहरण हैं।

किस देश के पास कितने परमाणुहथियार

रूस- 8000
अमरीका- 7300
फ्रांस- 300
चीन- 250
ब्रिटेन- 225
भारत- 90 से 110
पाकिस्तान- 100 से 120
नॉर्थ कोरिया- 6
इजराइल-80