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अयोध्या विवाद: 2 हफ्ते में दस्तावेज तैयार करें सभी पक्ष, 14 मार्च को होगी अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट

हाईकोर्ट के फैसले के सात साल बाद आज से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई जारी है।
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नई दिल्ली

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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 8 Feb 2018, 2:52 PM IST

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के मुद्दे पर आज फाइनल सुनवाई शुरु हो चुकी है। तीन जजों की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही है। बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा इसे एक जमीन विवाद की तरह ही देखें। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 2 सप्ताह में दस्तावेज तैयार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी। बीते 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि पिछले 7 सालों से लंबित इस मामले को और नहीं टाला जाएगा। 8 फरवरी से पहले सभी पक्ष अनुवाद, आपस में उनके लेन-देन की प्रक्रिया पूरी कर लें।


वक्फ बोर्ड ने की थी सुनवाई टालने की मांग
पिछली सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था, राममंदिर का कानूनी समाधान भाजपा के घोषणापत्र में था, सुनवाई हुई तो इसका 2019 चुनाव में असर पड़ेगा। इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था, बाहर क्या चल रहा है उससे हमें फर्क नहीं पड़ता।


7 साल पहले आया था हाईकोर्ट का फैसला
30 सितंबर 2010 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया था। हाई कोर्ट ने विवादित जगह पर मस्जिद से पहले मंदिर होने की बात मानी, लेकिन जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तब से ये मामला लंबित है।


आडवाणी के बाद एक और रथयात्रा
28 साल पहले 1990 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकली थी। मकसद था, राममंदिर निर्माण। तब से अब तक कई रथ यात्राएं निकल चुकी हैं। राम मंदिर मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो रही है। इस बीच रामराज्य रथ यात्रा के नाम से एक और आयोजन होने जा रहा है। इसे उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ 13 फरवरी को अयोध्या से रवाना करेंगे। 39 दिनों में यात्रा छह राज्यों से गुजरेगी और 40 सभाएं होगीं। इन सभाओं के लिए संबंधित राज्य सरकारों ने अनुमति दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्यों को ताकीद कर दिया है कि वे राम राज्य रथ यात्रा की सुरक्षा का इंतजाम करें। राम राज्य रथ यात्रा को लेकर केंद्र सरकार भी काफी गंभीर है। गृहमंत्रालय ने जिन राज्यों से रथ यात्रा निकलेगी उन राज्यों के पुलिस प्रमुखों को पत्र जारी कर यात्रा को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

अयोध्या विवाद में कब क्या हुआ
राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित जमीन को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए। जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी की एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद से ये मामला पेंडिंग है।