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Ayodhya Dispute: SC में राम मंदिर पर सुनवाई शुरू, लाइव प्रसारण की मांग खारिज

Ayodhya Dispute: 5 जजों की बेंच सुनेगी सभी का पक्ष कुल 14 अपीलों पर होनी है सुनवाई मध्‍यस्‍थता पैनल से नहीं निकला समाधान

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नई दिल्ली। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्‍यायाधीश रजंन गोगाई ने राम मंदिर विवाद पर बहस शुरू होते ही कहा कि सबसे पहले स्टेटस और लोकस पर दलीलें रखी जाएं। इसके बाद निर्मोही अखाड़े की ओर से सुशील जैन ने अपनी बात कहनी शुरू की।

इससे पहले राम मंदिर मामले पर सुशील जैन की ओर से लाइव प्रसारण की मांग को अदालत की तरफ से खारिज कर दिया गया है।

इस मुद्दे पर प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई, न्‍यायाधीश बोबडे, न्‍यायाधीश चंद्रचूड़, न्‍यायाधीश अशोक भूषण और न्‍यायाधीश अब्दुल नजीर कर रहे हैं।

निर्मोही अखाड़े की तरफ से सुशील जैन ने आंतरिक कोर्ट यार्ड पर मालिकाना हक का दावा किया। उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्षों से इस जमीन और मंदिर पर अखाड़े का अधिकार रजिस्ट्रेशन से भी पहले से ही है।

निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि सदियों पुराने रामलला की सेवा पूजा और मन्दिर प्रबंधन के अधिकार को छीन लिया गया है।

इससे पहले शुक्रवार को कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि मध्यस्थता का कोई नतीजा नहीं निकला है। इसलिए आज से इस मुद्दे रोजाना सुनवाई होगी। सुनवाई तबतक जारी रहेगी जब तक सभी पक्षों की बहस पूरी नहीं हो जाती।

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हाईकोर्ट ने दिया था भूमि को 3 हिस्‍सों में बांटने का आदेश

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसमें से एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था।

इस फैसले को भगवान राम सहित हिंदू मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में ये अपीलें 2010 से लंबित हैं और कोर्ट के आदेश से फिलहाल अयोध्या में यथास्थिति कायम है।

शीर्ष अदालत में 14 अपीलें लंबित

सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर कुल 14 अपीलें, 3 रिट याचिका और एक अन्‍य याचिका सुनवाई के लिए विचाराधीन हैं।
सुनवाई की शुरूआत मूल वाद संख्या 3 और 5 से होगी। मूल वाद संख्या 3 निर्मोही अखाड़ा का मुकदमा है। मूल वाद संख्या पांच भगवान रामलला विराजमान का मुकदमा है।

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मध्‍यस्‍थता पैनल विवाद सुलझाने में नाकाम

इससे पहले कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने की कोशिश के लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल को भेजा था। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में करीब पांच महीने मध्यस्थता चली लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला जिसके बाद कोर्ट में मामले की मेरिट पर सुनवाई का फैसला लिया है।

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