बंगाल चुनाव: नंद्रीग्राम में ममता बनर्जी गरजीं, बोलीं- मैं बंगाल की बेटी, बाहरी कैसे हो सकती हूं

Highlights

  • सीएम ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
  • शुभेंदु अधिकारी ने सीएम को 50 हजार वोटों से हराने का दावा किया है।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की हाईप्रोफाइल सीट नंदीग्राम सीएम ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इस बार सीएम ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके मद्देनजर वह आज (9 मार्च) नंदीग्राम पहुंच गई हैं और कल यानी 10 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगी।

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गौरलतब है कि नंदीग्राम में ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने सीएम को 50 हजार वोटों से हराने का दावा किया है।

यह है ममता बनर्जी की योजना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी अगले तीन दिन नंदीग्राम में ही रहेंगी। इस दौरान वह आम जनता से मिलेंगी और उन्हें टीएमसी सरकार द्वारा विकास कार्यों की जानकारी देंगी। इसके साथ लोगों को तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मतदान देने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

दीदी ने कही यह बात

नंदीग्राम में भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि कोई बंटवारे की कोशिश करेगा। मगर ऐसे लोगों की बिल्कुल मत सुनना। मैं अपना नाम भूल सकती हूं, लेकिन नंदीग्राम नहीं। ममता बनर्जी बोलीं कि मैं गांव की बेटी हूं। नंदीग्राम सीट खाली हुई, इसलिए यहां से लड़ रही हूं। मैं सिंगूर और नंदीग्राम को साथ लाई हूं। दीदी ने कहा कि आपको याद रखना होगा कि मैं किस तरह यहां पहुंची हूं।

'मुझ पर काफी अत्याचार हुए'

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कहा कि आंदोलन के दौरान मुझ पर कई अत्याचार हुए। उन्हें नंदीग्राम आने से रोका गया, लेकिन अत्याचार के बावजूद वे रास्ते से नहीं हटीं। वे नंदीग्राम के आंदोलन को पूरे बंगाल में ले गईं।

ममता ने कहा कि आपने उन्हें स्वीकारा, इसलिए वे नंदीग्राम आईं। सिंगूर के बाद नंदीग्राम का ही आंदोलन हुआ। उन्होंने पहले से सोच रखा था कि नंदीग्राम से ही चुनाव लड़ेंगी। ममता ने कहा कि वे बंगाल की बेटी हैं, बाहरी कैसे हो सकती हैं। आप नहीं चाहेंगे तो वे नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी।

नंदीग्राम आंदोलन भी किया जिक्र

ममता बनर्जी ने अपने भाषण के दौरान नंदीग्राम में हुए किसानों आंदोलन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए गोलियां तक चलाई गईं और लाठियां बरसाई गईं। उनकी गाड़ी पर भी गोलियां चलाई गई थीं।

Mohit Saxena
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