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फील्ड मार्शल करिअप्पा को मिले भारत रत्न सम्मान: जनरल रावत

भारतीय सेना के प्रथम कमांउर इन चीफ एमके करिअप्पा के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न की मांग की गई है।

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Bharat Ratna Award for field marshal cariappa

राजीव मिश्रा/नई दिल्ली।भारतीय सेना के प्रथम कमांउर इन चीफ एमके करिअप्पा के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न की मांग की गई है। यह मांग किसी ओर ने नहीं, बल्कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने की है। जनरल रावत ने कहा है कि अब समय आ गया है कि भारतरत्न के लिए फील्ड मार्शल करिअप्पा के नाम को आगे बढ़ाया जाए। सुबैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार और सेना की सिफारिश से करियप्पा के लिए भारत रत्न की मांग को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि करियप्पा को भारत रत्न देने में नजरअंदाज किया गया है। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिया गया। अगर कोहली तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ देते हैं तो क्या उन्हें भी भारत रत्न दिया जायेगा। वे सचिन का विरोध नहीं कर रहे लेकिन करियप्पा जैसा नायक दूसरा नहीं है। जनरल रावत ने उन्हें सरकार की ओर से सिफारिश भेजने को कहा है। सेना अपनी ओर से यह मुद्दा उठाएगी और इसी साल करियप्पा को भारत रत्न देने की सिफारिश की जाएगी।

पढ़ाई के दौरान खिलाड़ी भी रहे करियाप्पा

बता दें कि फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले कमाण्डर इन चीफ हैं। फील्ड मार्शल के नजदीकी लोग करिअप्पा को उनके नजदीकी लोग चिम्मा कहकर पुकारते हैं। उनका छात्र जीवन बेहद ही संयमित था। उन्होंने मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के दौरान करिअप्पा एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में भी जाने जाते थे। यही नहीं सेना में कमीशन पाने वाले प्रथम भारतीयों में वे भी शामिल थे। भारतीय सेना में उनको बेहद सम्मान से देखा जाता है। उन्होंने कई मोर्चों पर भारतीय सेना का सफल नेतृत्व किया था। 1949 में करिअप्पा को कमाण्डर इन चीफ बनाया गया था और 1953 तक वह इस पद पर रहे। इसके साथ ही करिअप्पा भारतीय सेना के उन दो अफसरों में शामिल हैं, जिन्हें फील्ड मार्शल के पद से नवाजा गया। उनके अलावा फील्ड मार्शल का पद सैम मानेकशा को दिया गया था।

क्या है भारत रत्न सम्मान

बता दें कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान भारत रत्‍न उच्‍चतम नागरिक सम्‍मान है, जो कला, साहित्‍य, विज्ञान, राजनीतिज्ञ, विचारक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, लेखक और समाजसेवी को असाधारण सेवा के लिए तथा उच्च लोक सेवा को मान्‍यता देने के लिए भारत सरकार की ओर से दिया जाता है। अभी तक यह सम्मान केवल देश के नागरिकों यानी सिविलियन को ही दिया जाता है, इसके सेना को शामिल नहीं किया गया है। इससे पहले खेल जगत भी इस सम्मान की सूची से बाहर था लेकिन भारतीय क्रिकेट सचिन तेंदुलकर को इस सम्मान से नवाजे जाने से पहले खेल जगत को इसमें शामिल कर लिया गया था।

किसे दिया जाता है भारत रत्न


देश का सवोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इनमें कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के साथ खेल में योगदान शामिल है। खेल को हाल ही में इस सूची में जोड़ा गया है। इसके बाद से ही यह मांग की जाती रही है कि सैन्य सेवा को भारत रत्न सम्मान से जोड़ा जाए। 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसकी स्थापना की थी। अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। शुरुाअत में यह सम्मान मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में बाद में जोड़ा गया। इसके बाद से 13 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया जा चुका है। हालांकि सुभाष चंद्र बोस को घोषित किया गया सम्मान वापस ले लिया गया था। इस कारण मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 12 भी मानी जाती है। एक साल में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है।