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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में एक सेक्स वर्कर की जिंदगी पर आधारित नाटक मुगालते को मंचन के दौरान एक प्रोफेसर ने बीच में ही रुकवा दिया। प्रोफेसर का मानना था कि इस प्रकार के नाटकों का मंचन विश्वविद्यालय के लिए सही नहीं है। बीएचयू की स्थापना के 100 साल पूरे होने के अवसर पर यूनिवर्सिटी में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली का प्रतिभा सांस्कृतिक संस्थान और बीएचयू का परफार्मिंग आट्र्स विभाग मिलकर इन कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
सेक्स वर्कर के जीवन पर आधारित था नाटक
नाटक के निर्देशक अर्पित शिघोरे ने बताया कि शनिवार को मुगालते नाटक के मंचन के दौरान यूनिवर्सिटी के ही एक प्रोफेसर ने आपत्ति जताते हुए इसे बंद करवा दिया।अर्पित ने बताया कि 45 मिनट लंबे इस नाटक का मंचन शनिवार दोपहर को किया जा रहा था। यह नाटक निखिल सचान की इसी नाम से लिखी किताब पर आधारित है। कहानी एक सेक्सवर्कर की जिंदगी के बारे में है। सभागार में नाटक का मंचन तय समय पर शुरू हुआ, लेकिन 20 मिनट बाद ही परफॉर्मिंग आट्र्स संकाय के नृत्य विभाग प्रमुख पी.सी. होंबाल मंच पर पहुंचे और उन्होंने नाटक रोकने की घोषणा की।
समय की कमी बताया कारण
होंबाल ने नाटक रुकवाते हुए कहा, 'ऐसे नाटक यहां नहीं हो सकते। बाद में जब हमने इस बारे में जानने के लिए होंबाल से संपर्क किया, तो उनका कहना था, 'समय कम होने के कारण नाटक को रुकवाया गया। एक तरफ जहां होंबाल समय की कमी के कारण मुगालते को बीच में बंद कराने का दावा कर रहे हैं, वहीं सभागार के उसी मंच पर मुगालते की टीम के जाने के फौरन बाद ही मट विलास नाम के नाटक का मंचन हुआ।
कोई शिकायत नहीं
मुगालते नाटक की मुख्य कलाकार स्मृति मिश्रा इस पूरे वाकये से हैरान हैं। उन्होंने बताया कि यही नाटक हमने नागरी नाटक मंडली सभागार में 2 महीने पहले किया था। उस समय दर्शकों ने नाटक को खूब पसंद किया। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन अगर बीएचयू प्रोफेसर को हमारे नाटक की कहानी या विषय से कोई दिक्कत थी, तो हमसे कहा जाता कि हम इसका अभ्यास ना करें। हम पिछले डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से नाटक की तैयारी और अभ्यास में लगे थे।
अश्लीलता नहीं
स्मृति बताती हैं कि मुगालते नाटक एक ऐसी कहानी पर आधारित है जिसमें बताया जाता है कि एक सेक्स वर्कर मुख्यधारा समाज में क्यों वापस नहीं लौट पाती। उन्होंने बताया कि इसके मंचन के दौरान किसी भी तरह की अश्लीलता नहीं दिखाई गई थी। सभागार में मौजूद दर्शकों ने भी नाटक का कोई विरोध नहीं किया था।
Published on:
28 Feb 2016 01:33 pm
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