11 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जीत के बाद समलैंगिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल- क्‍या आपस में कर पाएंगे शादी?

दुनिया के 26 देशों में समलैंगिक शादी को मान्‍यता मिली हुई है। अमरीकी अदालत ने 2015 में इसे वैध करार दिया था।

2 min read
Google source verification

image

Dhirendra Kumar Mishra

Sep 07, 2018

lgbt

जीत के बाद समलैंगिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल- क्‍या आपस में कर पाएंगे शादी?

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भारत में दो व्यस्क लोगों के बीच समलैंगिक संबंध कानूनी रूप से अपराध के दायरे से बाहर हो गया है। शीर्ष अदालत ने आईपीसी की धारा 377 को खत्‍म कर दिया है। लेकिन समलैंगिकों की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके समक्ष सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या अदालत के फैसले के आलोक में भारत में समलैंगिक अब शादी कर पाएंगे? या फिर उन्‍हें शादीशुदा कहा जा सकता है। इसकी अहमियत इसलिए महसूस की जाने लगी है कि शीर्ष अदालत के निर्णय में इस बात का जिक्र तक नहीं है। जबकि दुनिया के 26 देशों में समलैंगिक शादी को मान्‍यता मिली हुई है।

SC के निर्णय में जिक्र नहीं
इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में बताया है कि निजी पसंद को सम्मान देना होगा। समलैंगिकों को राइट टु लाइफ उनका अधिकार है। यह सुनिश्चित करना कोर्ट का काम है। एलजीबीटी समुदाय को उनके यौन आकर्षण से अलग करना उनको संविधान प्रदत्त नागरिक और निजता के अधिकारों से वंचित करना है। एलजीबीटी समुदाय को औपनिवेशिक कानून के जंजाल में नहीं फंसाया जाना चाहिए। गे, लेस्बियन, बाय-सेक्सुअल औऱ ट्रांसजेंडर सबके लिए नागरिकता के एक समान अधिकार हैं। इस बात को लेकर सभी को बेहतर सोच विकसित करने की आवश्‍यकता है। जहां तक बात माहौल की है तो आजादी के समय और अब में बहुत अंतर आ गया है। हम लोग पहले से बहुत बेहतर माहौल में रहने लगे हैं।

इन देशों में है मान्‍यता
जिन देशों में समलैंगिकों के बीच आपस में शादी को मान्‍यता है उनमें बेल्जियम, कनाडा, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, डेनमार्क, उरुग्वे, न्यूजीलैंड, फ्रांस, ब्राजील, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, लग्जमबर्ग, फिनलैंड, आयरलैंड, ग्रीनलैंड, कोलंबिया, जर्मनी और माल्टा देश शामिल हैं। नीदरलैंड ने सबसे पहले दिसंबर, 2000 में समलैंगिक शादियों को कानूनी तौर से वैध दर्जा मिला। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भारत में यह सवाल अहम हो गया है।

62 फीसदी अमरीकी शादी के पक्ष में
आपको बता दें कि 2015 में अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादियों को वैध करार दिया था। हालांकि 2001 तक 57 फीसदी अमेरिकी लोग इसका विरोध करते थे। प्यू रिसर्च के मुताबिक 2017 में 62 फीसदी अमरीकी इसका समर्थन करते हैं। दुनिया के 26 देश ऐसे हैं जो समलैंगिकता को कानूनन सही करार दे चुके हैं। 2017 में ऑस्ट्रेलिया में समलैंगिक शादियों के खिलाफ वोट कराया गया तो उस समय 150 सदस्यों के संसद में सिर्फ चार सदस्यों ने खिलाफ में वोट किया था।

संघ शादी के खिलाफ
ये बात सही है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत किया है, लेकिन साथ में यह भी कहा है कि इस तरह के संबंध अप्राकृतिक हैं और भारतीय समाज ऐसे संबंधों को मान्यता नहीं देता। इसी के साथ उन्होंने कहा कि इनकी शादी अप्राकृतिक ही मानी जाएगी।

बड़ी खबरें

View All

विविध भारत

ट्रेंडिंग