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दो साल से नोटबंदी की समीक्षा कर रही संसदीय समिति की रिपोर्ट को भाजपा सांसदों ने रोका, दिया असहमति पत्र

संसदीय समिति में दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

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नई दिल्ली। नोटबंदी जब से लागू हुई है तब से मोदी सरकार आलोचना झेल रही मोदी सरकार। संसदीय समिति करीब दो साल से नोटबंदी की समीक्षा कर रही है। अब समिति में शामिल भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने नोटबंदी पर विवादित मसौदा रिपोर्ट को स्वीकार करने से रोक दिया है। रिपोर्ट पर भाजपा सांसदों ने एतराज जताया। मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने मसौदा रिपोर्ट में कहा कि नोटबंदी का फैसला व्यापक प्रभाव वाला था। इससे नकदी की कमी की वजह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कम-से-कम एक प्रतिशत की कमी आई और असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी में वृद्धि हुई’’।

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भाजपा सांसदों ने दिया असहमति पत्र

गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मसौदा रिपोर्ट का विरोध किया और इसको लेकर वीरप्पा मोइली को असहमति का पत्र दिया, जिसका समिति में शामिल भाजपा के सभी सांसदों ने समर्थन किया। निशिकांत दुबे ने नोटबंदी को सबसे बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि, ‘‘ पीएम मोदी के इस निर्णय का राष्ट्र हित में देश के सभी नागरिकों ने समर्थन किया’’। असहमति पत्र में कहा गया है कि नोटबंदी के फैसले से काला धन पर लगाम लगाी और मुद्रास्फीति परिदृश्य बेहतर हुई। बता दें कि संसदीय समिति में 31 लोग शामिल थे। इस असहमति पत्र पर भाजपा के 11 अन्य सांसदों ने हस्ताक्षर किए। समिति में दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। समिति में भाजपा का बहुमत है। इसलिए मसौदा रिपोर्ट स्वीकार नहीं सकी। बताया जाता है कि नोटबंदी को लेकर रिपोर्टी में काफी आलोचनात्मक भाषा का प्रयोग किया गया। रिपोर्ट में ये भी मांग की गई कि सरकार नोटबंदी के लक्ष्य और उसके आर्थिक प्रभाव को लेकर एक अध्ययन कराए।


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