झारखंड: मॉब लिंचिंग के आरोपियों का केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने मिठाई और मालाओं से किया स्वागत

झारखंड: मॉब लिंचिंग के आरोपियों का केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने मिठाई और मालाओं से किया स्वागत

केंद्रीय नागरिक उड्डयन राजयमंत्री जयंत सिन्हा ने बरी हुए आरोपियों को अपने घर बुलाकर फूलों की माला पहनाई, मिठाई खिलाई और उनके साथ फोटो भी खिंचाई। इसके बाद उन पर सियासी हमले तेज हो गए।

रांची। झारखंड के रामगढ़ में बीफ ले जाने के शक में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए मुस्लिम युवक अलीमुद्दीन की हत्या के आरोपियों में से 8 को को झारखंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद प्रदेश और जिला भाजपा कार्यालय में मिठाई बांटी गई और केंद्रीय उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने बरी हुए आरोपियों का अभिनंदन किया।

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जिला भाजपा कार्यालय में बंटी मिठाई

आरोपियों की रिहाई के बाद रामगढ़ और रांची स्थित भाजपा कार्यालयों में जमकर जश्न मनाया गया। इन कार्यालयों में मिठाइयां बांटी गईं और पटाखे भी फोड़े गए। आरोपियों की रिहाई के लिए संघर्ष करने वाले पूर्व भजापा विधायक शंकर चौधरी नेजमानत मिलने पर खुशी का इजहार किया। इससे पहले जिला अदालत ने इस हत्‍याकांड में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा पाए लोगों में एक नाबालिक भी है जिसे बाल सुधार गृह भेजा गया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने मॉब लिंचिंग के दौरान बनाए गए वीडियो को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। इस वजह से 8 लोगों को जमानत मिल गई।

जयंत सिन्हा के शामिल होने पर राजनीति शुरू

केंद्रीय नागरिक उड्डयन राजयमंत्री जयंत सिन्हा ने बरी हुए आरोपियों को अपने घर बुलाकर फूलों की माला पहनाई, मिठाई खिलाई और उनके साथ फोटो भी खिंचाई। इसके बाद उन पर सियासी हमले तेज हो गए। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने जयंत सिन्हा को निशाने पर लिया। विपक्ष का कहना है कि देश में जब शक का माहौल बना हुआ हैं और अफवाहों के आधार पर अभी तक 27 लोगों की हत्या की जा चुकी है ऐसे में एक केंद्रीय मंत्री का यह गैर जिम्मेदाराना कृत्य बेहद निंदनीय है।

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क्या है मामला

29 जून 2017 को झारखंड के रामगढ़ में मांस के व्यापारी अलीमुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। अलीमुद्दीन की वैन में बीफ होने के शक में लोगों ने उसे पकड़ लिया था और अलीमुद्दीन की पीट पीट कर हत्या कर दी थी। मांस कारोबारी की हत्या और उसके बाद से इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जा रही थी। भाजपा के नेताओं ने आरोपियों का शुरू समर्थन किया और बाकी अन्य पार्टियों ने इनके लिए फांसी की मांग की थी।

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