चेन्नई। यह बात जगजाहिर है कि भारत में त्वचा के रंग से ही लोगों के सुंदरता का पैमाना निर्धारित किया जाता है। जिसके चलते श्वेत रंगवालों को खूबसूरत और सांवले लोगों को उनसे नीचे का दर्जा दिया जाता है। रंग-रूप के इस चर्चा में देवी-देवताओं का मुद्दा भी पीछे नहीं रहा। मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा वो शख्स हैं, जिन्होंने सबसे पहली बार हिंदू देवी-देवताओं को आम इंसान जैसा दिखाया था।
अभी तक भगवान की परिकल्पना गोरे रंग में ही होती रही है
उन्होंने कई पौराणिक कथाओं और उनके पात्रों के जीवन को अपने कैनवास पर उतारा लेकिन वे भी हिंदू देवियों के चित्रों को अक्सर सुन्दर दक्षिण भारतीय महिलाओं के ऊपर ही दर्शाते थे। यद्यपि कथाओं में श्री कृष्णा और महादेव शंकर के सांवले रंग वाले होने का वर्णन है, लेकिन उस चित्रकारी के बाद यह स्थापित हो गया कि धीरे-धीरे पौराणिक कथाओं और पात्रों की भी परिकल्पना गोरे रंग में ही की जाने लगी।
दो कलाकारों ने बताया ‘डार्क इज डिवाइन’
समाज में गोरे रंग के तरफ बढ़ रहे लोगों के मनोग्रस्ति को चेन्नई के दो कलाकारों ने चुनौती देने की ठानी और ‘डार्क इज डिवाइन’ नाम का एक फोटो कैंपेन शूट किया। चेन्नई के एक फोटोग्राफर नरेश नील ने अपने साथी भारद्वाज सुंदर के साथ मिल कर इस फोटोशूट में भारत के प्रमुख देवी देवताओं को सांवले रंग में दर्शाया है।उन्होंने इसके लिए भगवानों में लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती, शंकर, लार्ड मुरुगन, लव और कुश के साथ सीता और बाल कृष्णा को चुना क्योंकि उनके हिसाब से ये प्रमुख देवी-देवता हैं जिन्हें श्वेत रंग में पूजा जाता है। फोटोशूट के दौरान उन्होंने यह ध्यान में रखा कि रंग के अलावा चित्रलेखन के बाकी सभी पहलुओं को पहले के तरह ही बरकरार रखा जाए। वीडियो में देखिए उनके द्वारा की गई फोटोशूट की तस्वीरें।