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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की नई बेंच गठित, जस्टिस अशोक भूषण और अब्दुल नजीर हुए शामिल

पांच जजों की बेंच 29 जनवरी को अयोध्या मामले पर सुनवाई करेगी।

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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की नई बेंच गठित, जस्टिस अशोक भूषण और अब्दुल नजीर हुए शामिल

नई दिल्ली: अयोध्या मामले पर फिर से नई बेंच गठित की गई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई ने नई बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और अब्दुल नजीर को शामिल किया है। इससे पहले जस्टिस बोबड़े और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और सीजीआई रंजन गोगई इस बेंच में हैं। पांच जजों की बेंच 29 जनवरी को अयोध्या मामले पर सुनवाई करेगी।

यू यू ललित ने पीठ से खुद को किया अलग

गौरतलब है कि 10 जनवरी को राम मंदिर विवाद पर सुनवाई होनी थी। लेकिन मामला एक बार फिर से आगे टल गई । दरअसल वरिष्‍ठ वकील आरके धवन ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ में जस्टिस यूयू ललित के शामिल होने पर सवाल उठाया। धवन ने कहा कि जस्टिस ललित बाबरी मस्जिद विवाद में पूर्व में कल्‍याण सिंह की पैरवी कर चुके हैं। इस पर जस्टिस यूयू ललित ने खुद को पीठ से अलग कर लिए। जिसके बाद सीजेआई रंजन गोगोई ने नई बेंच गठित करने के लिए तारीख आगे बढ़ा दी। 25 तारीख को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई ने दो जजों को इसमें फिर से शामिल कर लिया है। अब राम मंदिर मुद्दे पर नई पीठ 29 जनवरी को सुनवाई करेगी।

पीएम ने राम मंदिर पर दिया बड़ा बयान

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर मसले पर सरकार का रूख साफ कर दिया है। साल 2019 के पहले दिन एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही इसपर अध्यादेश लाने पर विचार करेगी। मंदिर का निर्माण संविधान के तहत किया जाएगा।

संघ मंदिर निर्माण के लिए सरकार पर बना रहा दबाव

गौरतलब है कि आरएसएस लगातार केंद्र सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने का दबाव बना रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार मोदी सरकार को नसीहत दे चुके हैं। आरएसएस से जुड़े संगठन भी राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। वहीं एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना भी राम मंदिर के लिए अध्यादेश की मांग की है।

भूमि के मालिकाना हक पर है विवाद

बता दें इसी साल अक्टूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान कोर्ट ने जनवरी में सुनवाई करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि के मालिकाना हक विवाद मामले में लगाई गई दीवानी याचिका को अगले साल जनवरी के पहले हफ्ते तक टाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर तीन मिनट सुनवाई हुई। इस मामले को तीन महीने तक के लिए टाल दिया गया।