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चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई के सामने अयोध्या मामले समेत होंगी यह पांच बड़ी चुनौतियां

नए CJI जस्टिस रंजन गोगोई की वो पांच बड़ी चुनौतियां, जिन पर टिकी है देश की निगाहें
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नई दिल्ली

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Dheeraj Sharma

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Updated: 3 Oct 2018, 11:34 AM IST

CJI

जीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई के सामने अयोध्यया मामले समेत होंगी यह पांच बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली। भारत के 46 वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेते ही जस्टिस रंजन गोगोई इस पद पर आसीन होने वाले असम से पहले जज हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक कार्य संभालने के बाद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना होगा। उनमें पांच प्रमुख चुनौतियों का यहां जिक्र किया जा रहा है जिन पर सबकी निगाह रहेगी।

1. अयोध्या विवाद
जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण व जस्टिस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय पीठ ने पिछले 27 सितंबर को अयोध्या मामले को बड़ी पीठ के हवाले करने से इनकार करते हुए 29 अक्टूबर से अपीलों पर सुनवाई तय किया है। चूंकि इस पीठ की अगुवाई जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे थे, इसलिए अब नई पीठ का गठन किया जाना है। क्या जस्टिस गोगोई स्वयं इस पीठ की अगुवाई करेंगे और क्या कोई और रद्दोबदल हो सकता है? इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिल जाएंगे। यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, इसलिए इस पर सबकी निगाह जमी हुई है।

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2. मास्टर ऑफ रोस्टर
सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों को बराबर माना जाता है पर प्रधान न्यायाधीश को मास्टर ऑफ रोस्टर कहा गया है। पहले भी कई बार मास्टर ऑफ रोस्टर के अधिकारों को व्याख्यायित किया जा चुका है। निवृत्तमान सीजेआइ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी हाल में मास्टर ऑफ रोस्टर के अधिकारों को स्पष्ट किया था। जस्टिस गोगोई उन चार न्यायाधीशों में एक रहे हैं जिन्होंने जस्टिस मिश्रा द्वारा मास्टर ऑफ रोस्टर अधिकार के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ‘सब कुछ ठीक नहीं’ चल रहा है। अब यह अधिकार उनके पास होगा। जस्टिस गोगोई के सामने संभवत: यही सबसे बड़ी चुनौती होगी।

3 लंबित मुकदमों की भरमार
देशभर की अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं। हाल ही में जस्टिस गोगोई ने इसे न्याय-प्रणाली की प्रतिष्ठा गिरानेवाला माना था। इनके निबटारे के लिए विशेष योजना का शीघ्र खुलासा करने का जिक्र भी किया था।

4. जजों की नियुक्ति और एमओपी
सं विधान पीठ ने 16 दिसंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्टों के जजों की नियुक्ति के लिए नया मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) बनाने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया था। अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

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5. असम का एनआरसी मामला
असम के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर सुनवाई करने वाली पीठ का नेतृत्व अब तक जस्टिस गोगोई ही कर रहे थे। अब आगे क्या होगा, उस पर सबकी निगाह है।