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डोकलाम बाद अब ब्रह्मपुत्र का रुख मोडऩे की फिराक में चीन, भारत की बढ़ी चिंता

डोकलाम के बाद अब चीन की निगाहें अब हमारी ब्रह्मपुत्र नदी पर हैं। ड्रैगन अब ब्रह्मपुत्र का रुख मोडऩे की तैयारी में है।

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बीजिंग। डोकलाम के बाद अब चीन की निगाहें अब ब्रह्मपुत्र नदी पर हैं। ड्रैगन अब ब्रह्मपुत्र का रुख मोडऩे की तैयारी में है। वह अपनी एक महत्वाकांक्षी परियोजना तिब्बत-शिनजियांग टनल के तहत नदी के पानी को उत्तर पश्चिमी चीन के शिनजियांग के बैरन क्षेत्र में ले जाने की योजना बना रहा है। यह धुर रेगिस्तानी इलाका तकलामाकन है, जिसको हरा-भरा किया जाएगा। इसके लिए 1000 किमी टन सुरंग बनाई जाएगी, जो दुनिया की सबसे लंबी सुरंग होगी। सुरंग की क्षमता बढ़ाने पर काम भी शुरू हो चुका है। यून्नान प्रांत में सुरंग बनाने का कार्य अगस्त से ही शुरू हो चुका है। यहां सुरंग की लंबाई कुल 600 किमी होगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी इंजीनियर यूनान में सुरंग बनाने के लिए तकनीकों पर परीक्षण कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरों ने इस परियोजना की मंजूरी के लिए चीन सरकार को अपनी रिपोर्ट इस साल मार्च में ही सौंप दी थी। बताया जा रहा है कि एक किमी सुरंग बनाने में 976 करोड़ की लागत आएगी। वहीं 600 किमी के युन्नान प्रोजेक्ट पर 77,000 करोड़ की लागत आएगी। इस परियोजना पर 3 विशालकाय बांध बनेंगे। इसके पूरा होने में करीब 10 साल लगने का अनुमान लगाया जा रहा है।

तिब्बत से शिनजियांग ले जाएगा पानी
चीन ब्रह्मपुत्र के पानी को तिब्बत के यारलुंग सांगपो से शिनजियांग ले जाएगा। यह सुरंग तिब्बत के पठारों से होते हुए गुजरेगी, जहां इसे कई झरनों से भी जोड़ा जाएगा। इंजीनियर पानी के रुख को तिब्बत के सांगरी काउंटी से मोडऩे की योजना बना रहे हैं, जहां से नदी अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।

तिब्बत से निकलती है ब्रह्मपुत्र
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के बुरांग काउंटी स्थित आंगसी ग्लेशियर से ही निकलती है। इसे चीन और तिब्बत में यारलुंग सांगपो कहा जाता है। स्थानीय भाषा में इसका अर्थ शुद्ध करने वाला होता है। माना जा रहा है कि सुरंग बनने के बाद यह चीन की नायाब इंजीनियरिंग का शानदार मिसाल होगी। प्रस्तावित सुरंग को ‘शिनजियांग को कैलिफोर्निया’ में बदलने वाला बताया जा रहा है। युनान सुरंग इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है।

भारत की बढ़ी चिंता
तिब्बत-शिनजियांग सुरंग को लेकर भारत पहले से ही चिंतित है। भारत की चिंता इस बात की है चीन की इस परियोजना से उसे ब्रह्मपुत्र का पानी काफी कम मिलेगा, जिससे पूर्वोत्तर के इलाके काफी प्रभावित होंगे। चीन यह काम गुपचुप कर रहा है। माना जा रहा है कि अगर उसकी यह योजना परवान चढ़ी तो भारत के पूर्वोत्तर इलाके, बांग्लादेश में या तो बाढ़ आएगी या फिर इन क्षेत्रों को पानी की कमी से जूझना पड़ेगा। इससे पहले भी भारत चीन में निर्माणाधीन ब्रह्मपुत्र पर जलविद्युत परियोजना को लेकर ऐतराज जता चुका है। हाल ही में चीन ने ऐलान किया था कि वह यारलुंग सांगपो पर एक बांध बना रहा है। 2001 में ऐसा ही एक बांध तिब्बत में ढह गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी और अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी से सटी 140 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हो गया था।

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