
Tamilnadu jhanki
नई दिल्ली। राजपथ पर शनिवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर हर बार की तरफ भव्य परेड का आयोजन किया गया। परेड में इस बार 16 राज्यों की झांकियों को राजपथ पर प्रदर्शित किया गया, लेकिन तमिलनाडु की झांकी को लेकर कल से ही विवाद हो रहा है। दरअसल, तमिलनाडु की झांकी में महिलाओं के स्टैच्यू को लेकर ये विवाद हो रहा है। इस झांकी में महिलाओं को बिना ब्लाउज के प्रदर्शित किया गया था। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि झांकी में महिलाएं सिर्फ साड़ी में नजर आ रही हैं।
क्या मकसद था महिलाओं को बिना ब्लाउज दिखाने का
आपको बता दें कि तमिलनाडु की झांकी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मदुरै यात्रा को प्रदर्शित किया गया था, जो उन्होंने 1921 में की थी। गांधी जी की इस यात्रा के दौरान उन्होंने कपड़ों का त्याग कर दिया था और सिर्फ एक धोती पहनने का फैसला किया था। ऐसा फैसला उन्होंने यहां के किसानों की दयनीय हालत को देखकर किया था।
द्रविड़ इयक्का तमिझर पेरावई पार्टी ने उठाए सवाल
इस झांकी पर सवाल खड़ा करने वाले राजनीतिक दल द्रविड़ इयक्का तमिझर पेरावई के महासचिव सुबा वीरापांडियन का कहना है कि महात्मा गांधी ने जब मदुरै की यात्रा की थी तो उसके बाद गांधी जी ने कपड़ों का त्याग कर दिया था, लेकिन महिलाएं उसके बाद भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनती थीं। सुबा वीरापांडियन का कहना है कि त्रावणकोर क्षेत्र में महिलाएं इस तरह का पहनावा पहनती थीं, मगर महिलाओं के ब्लाउज़ पहनने पर बैन को 19वीं शताब्दी में ही खत्म कर दिया गया था।'
पूरी दुनिया देख रही थी झांकी को- सुबा वीरापांडियन
उन्होंने कहा ऐसा नहीं होना चाहिए था, वह भी तब जब उस परेड को पूरी दुनिया देख रही थी। असंगठित मजदूर संघ की सलाहकार आर गीता ने भी कहा कि बिना ब्लाउज़ के महिलाओं को दिखाने से बचा जा सकता था।
मामले पर सूचना और प्रसारण विभाग की सफाई
इस मामले पर राज्य के सूचना और प्रसारण विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि झांकी का मकसद महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी किसी घटना को दिखाना था। उन्होंने कहा, 'हमें झांकी से संबंधित कई फोन कॉल्स मिले हैं। हालांकि इस थीम को इसीलिए चुना गया था क्योंकि बहुत से लोगों को गांधी और तमिलनाडु के इस कनेक्शन के बारे में नहीं पता होगा।'
Published on:
27 Jan 2019 01:58 pm
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