Coronavirus : वैक्‍सीन की रेस में कई कंपनियों ने कमा लिए करोड़ों डॉलर, अब जारी है जांच

 

  • 11 कंपनियों ने मार्च से अब तक बेच दिए 1 बिलियन डॉलर से ज्‍यादा के शेयर।
  • Vaccine बनाने के Project को लेकर किए जा रहे हैं फेक दावे।
  • Investors कम समय में ज्यादा कमाने की लालच में लगा रहे हैं पैसा।

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस महामारी ( Coronavirus Pandemic ) ने पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया है। इससे बचने के लिए कोरेाना वैक्सीन ( Corona Vaccine ) की मांग चरम पर है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर ( Global Level ) पर सबसे पहले कोरोना वायरस वैक्सीन तैयार को लेकर प्रतिस्पर्धा भी सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, दुनियाभर में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के बीच निर्माता कंपनियों के बीच सबसे पहले इस लक्ष्य को हासिल करने को लेक होड़ भी मची है ।

लेकिन, वैक्सीन बनाने की होड़ में विजेता वही होगा जो सबसे पहले आपदा को अवसर में बदलने में सफल होगा। आजकल पीएम मोदी ( PM Modi ) भी आपदा को अवसर में बदलने की बात बार- बार कर रहे हैं। पीएम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि जो कंपनियां वैक्सीन पहले बनाने में कामयाब होंगी वही कोरोना बीमारी से जुड़ीं वैश्विक बाजार ( Global market ) को लूट पाएंगी। बाजार लूटने का सीधा मतलब होता अरबों या खरबों डॉलर की कमाई।

Vaxart ने तत्काल कमाए 200 मिलियन डॉलर

इस अवसर का लाभ उठाते हुए वैक्सीन बनाने में जुटीं कई कंपनियों ने बिना वैक्सीन बनाए ही करोड़ों डॉलर कमा लिए हैं। 26 मार्च को सान फ्रांसिस्‍को की एक छोटी सी कंपनी Vaxart ने भी कुछ ऐसा कर दिखाया है। कंपनी ने ऐलान किया कि वह जिस वैक्‍सीन पर काम कर रही थी उसे अमरीकी सरकार ने ऑपरेशन वार्प स्‍पीड (Operation Ward Speed ) में शामिल कर लिया है।

इसके बाद Vaxart के शेयर आसमान छूने लगे। कंपनी के शेयर में 6 गुना तक बढ़त देखी गई। एक फंड जिसने कंपनी में पैसा लगाया था उसे 200 मिलियन डॉलर का फौरन मुनाफा हुआ और वह अपने हिस्से की कमाई लेकर Vaxart से अलग हो गया।

बता दें कि अमरीकी सरकार ने ऑपरेशन वार्प स्‍पीड कोरोना से लड़ाई के लिए वैक्‍सीन और दवाएं डेवलप करने के लिए शुरू किया है।

11 कंपनियों ने 1 बिलियन डॉलर से ज्‍यादा के शेयर बेचे

इसी तरह दुनियाभर की 11 कंपनियों में निवेशक इसलिए दांव लगा रहे हैं क्‍योंकि जिसकी वैक्‍सीन सफल रहेगी वह उसकी अरबों डोज बेचकर जबर्दस्‍त मुनाफा कमा सकता है। निवेशक ( Investor ) को इसका सीधा लाभ मिलेगा। द न्‍यू यॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक फार्मास्‍यूटिकल्‍स और मेडिकल सेक्‍टर ( pharmaceuticals and medical sector ) के सीनियर एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स और बोर्ड मेंबर्स इस आपदा का फायदा उठाने में लगे हैं। कोरोना काल के इस दौर में कुछ कंपनियां तो शेड्यूल्‍ड कंपनसेशन या ऑटोमेटिक स्‍टॉक ट्रेड्स से पैसा कमा रहे हैं। मगर कुछ अलग से भी निवेश करा रहे हैं। वहीं कुछ कंपनियों ने एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स को वैक्‍सीन प्रोग्रेस का ऐलान करने से पहले स्‍टॉक में विकल्‍प दे दिए।

रेजेनेरॉन 700 मिलियन शेयर बेचे

इसी तरह अमरीका ( America ) की ही एक बायोटेक कंपनी रेजेनेरॉन के शेयर फरवरी से 80 प्रतिशत ऊपर चढ़ चुके हैं। तब कंपनी ने ऐलान किया था कि वह स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ( Health department ) के साथ मिलकर कोविद-19 की दवा बना रही है। उसके बाद कंपनी के बोर्ड मेंबर्स और एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स करीब 700 मिलियन के शेयर बेच चुके हैं। इसके अलावा कंपनी Moderna का स्‍टॉक प्राइस भी तीन गुना बढ़ गया है। कंपनी के लोगों ने जनवरी से अबतक 248 मिलियन डॉलर के शेयर बेचे हैं।

दावा पेश करने वाली कंपनियों की जांच जारी

ऐसी कंपनियों के अधिकारी पॉजिटिव हेडलाइंस पाने के लिए वैक्सीन को लेकर बढ़ चढ़कर दावे किए हैं जो शायद कभी सच न हों। अब वहां की सरकारें ऐसी ही कुछ कंपनियों की जांच भी कर रही हैं जिन्‍होंने ऑपरेशन वार्प स्‍पीड के साथ अपने जुड़ाव को मार्केटिंग के लिए यूज किया है।

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