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कोर्ट ने ‘दूसरे माल्या’ नितिन कासलीवाल को विदेश जाने से रोका

एस. कुमार के मुखिया नितिन कासलीवाल को कर्नाटक हाईकोर्ट ने 'दूसरा विजय माल्या' बनने से रोक दिया है। उनका पासपोर्ट तब तक मिलना मुश्किल है, जब तक वे बैंकों का ऋण चुकता नहीं कर देते।

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shachindra shrivastava

Aug 01, 2017

Nitin Kasliwal

Nitin Kasliwal

बेंगलूरु। एस. कुमार के मुखिया नितिन कासलीवाल को कर्नाटक हाईकोर्ट ने 'दूसरा विजय माल्या' बनने से रोक दिया है। उनका पासपोर्ट तब तक मिलना मुश्किल है, जब तक वे बैंकों का ऋण चुकता नहीं कर देते। नितिन ने जिन बैंकों से लगभग 6,500 करोड़ का लोन लिया है उनको डर है कि नितिन भी विजय माल्या की तरह उनका पैसा चुकाए बिना विदेश भाग सकते हैं। कर्नाटक की हाई कोर्ट ने भारत के अग्रणी व्यापारियों में से एक नितिन शंभू कुमार कासलीवाल की वह अर्जी खरिज कर दी जिसमें उन्होंने उनका पासपोर्ट रिलीज किए जाने की प्रार्थना की थी।

6,500 करोड़ रुपए का कर्ज
कासलीवाल को कर्ज देने वाले बैंकों का कहना है कि नितिन की फर्मों पर लगभग 6,500 करोड़ रुपए का कर्ज है और अगर उन्हें भारत से बाहर जाने की इजाजत दी गई तो वे भी विजय माल्या की तरह किसी दूसरे देश में शरण ले सकते हैं। बैंक ये रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं।

लोन डिफॉल्टर्स की सूची में प्रकाशित की गई कासलीवाल की फोटो
कासवीवाल को आईडीबीआई ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है। वह भारत के पहले ऐसे बिजनसमैन हैं जिनकी फोटो किसी बैंक ने 'नेम ऐंड शेम' के तहत लोन डिफॉल्टर्स की सूची में प्रकाशित की है। 21 दिसंबर 2016 को बेंगलुरु में ऋण वसूली प्राधिकरण (डीआरटी) ने एक आदेश पारित किया था जिसमें नितिन के पासपोर्ट को सीज कर दिया गया था। कासलीवाल के ऊपर आईडीबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सेन्ट्रल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक और इंडियन बैंक का कर्ज है। इन बैंकों से उन्होंने निजी गारंटी पर अपनी कंपनियों, एसकेएनएल, आरटीआईएल और बीएचआरएल के लिए लोन लिए थे।

करार की शर्तों को न मानने पर गरीब को जेल नहीं भेजा जा सकताः वकील
कासलीवाल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी को उसकी गरीबी और परिस्थितयों के कारण करार की शर्तों को न मानने पर जेल नहीं भेजा जा सकता। उन्होंने यह भी कह कि डीआरटी के पास पासपार्ट जब्त करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी विदेश जा चुके हैं और तब उन्होंने कोर्ट की सारी शर्तों को माना था।

पासपोर्ट देने से फंस सकते हैं बैंकों के पैसे
अधिवक्ता ने कहा कि कासलीवाल का विदेश जाना बेहद जरूरी है। उनकी दो फैक्ट्रियों में 3,000 लोग काम करते हैं। इनके व्यवसाय के सिलसिले में उन्हें विदेश जाना है। वहीं, बैंकों के वकील ने कहा कि कासलीवाल पर बैंको के कुल 6,496 करोड़ रुपए बकाया हैं। मामले में सुनवाई अभी चल रही है, इसलिए अगर उन्हें पासपोर्ट दिया गया तो हो सकता है कि वे भी विजय माल्या की तरह विदेश में शरण ले लें और बैंकों के पैसे फंस जाएं।

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