
हफ्ते भर पहले अचानक चर्चाओं में आए देवरापल्ली प्रकाश राव एक बार फिर से अपनी पुरानी मुफलिसी के जिंदगी में पहुंच गए हैं। दरअसल, कटक के बक्शी बाजार में छोटी से चाय की स्टॉल लगाने वाले देवरापल्ली उस समय सुर्खियों में आ गए थे, जब पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की थी।

यह मुलाकात पीएम मोदी ने अपने उड़ीसा दौरे के दौरान कटक के किला पाडिया में हुई जनसभा से पहले की थी। माना जा रहा था कि पीएम से मुलाकात के बाद चाय वाले के दिन बहुर जाएंगे, लेकिन यह अनुमान कोरा गलत साबित हुआ।

दरअसल, देवरापल्ली प्रकाश राव के की कहानी के पीछे एक विशेष बात जुड़ी है। देवरापल्ली चाय की एक छोटी से स्टॉल लगाते हैं। उनके पूरे घर का खर्च भी इस दुकान की आमदनी पर ही टिका है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि देवरापल्ली चाय की दुकान से होने वाली 700 रुपए रोजना की कमाई में से आधी झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों पर खर्च कर देते हैं।

असल में देवरापल्ली से इस रकम से एक स्कूल चलाते हैं, जिसमें इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। देवरापल्ली यह स्कूल पिछले 17 सालों से चला रहे हैं। उनकी इस बात को सुनकर पीएम मोदी ने खुद देवरापल्ली से मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने एक ट्वीट कर इस स्कूल की एक तस्वीर भी शेयर की थी। इस मुलाकात के बाद माना जा रहा था कि पीएम मोदी या प्रशासन की ओर से आर्थिक मदद दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और चंद दिनों की सुर्खियां पाकर देवरापल्ली फिर से अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट गए।

आपको बता दें कि मन की बात कार्यक्रम में भी पीएम मोदी ने देवरापल्ली का जिक्र किया था और उनको एक मिसाल बताया था। भारत सरकार से प्रोत्साहन की उम्मीद रखने वाले देवरापल्ली प्र अपने इस योगदान के लिए कई अवार्ड जीत चुके हैं। 2016 में उनको मानवाधिकार अवार्ड और 2015 में एनी बेसेंट अवार्ड से नवाजा गया था। देवरापल्ली के स्कूल में फिलहाल 74 बच्चे शिक्षा पा रहे हैं, जिनको 6 महिला टीचर पढ़ा रही हैं।