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रेड लाइट एरिया से किया अमेरिका तक का सफर, पिता था जिंदगी का सबसे बड़ा खलनायक

एक एनजीओ की मदद से वो ड्रम बजाने की ट्रेनिंग लेने के लिए अमेरिका भी जा चुकी है।

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Sheetal Jain

नई दिल्ली। हमारा समाज चाहें कितना भी आगे क्यों न बढ़ गया हो लेकिन महिलाओं के प्रति उनकी सोच अभी भी जस की तस है और उसपर भी वो महिला यदि सेक्स वर्कर हो तो सोचनें का दायरा और भी छोटा हो जाता है। समाज में सबके मन में एक प्रचलित धारणा ये है कि एक सेक्स वर्कर की बेटी एक सेक्स वर्कर ही हो सकती है लेकिन हमेशा ऐसा ही हो ये ज़रूरी तो नहीं। एक इंजीनियर का बेटा या बेटी ज़रूरी नहीं कि वहीं हो या फिर एक टीचर का बेटा ज़रूरी नहीं कि वो भी अध्यापक ही हो तो फिर सेक्स वर्कर की बेटी भी वहीं पेशा अपनाएं ऐसा भी ज़रूरी नहीं लेकिन आज भी रेड लाइट एरिया या फिर वेश्याओं के बारे में कतराने वाला अपना देश यहीं मानता है कि मां के समान उसकी बेटी भी माहौल के चलते बड़े होकर वहीं काम करेगी।

इंसान के इसी सोच को गलत साबित कर दिया शीतल ने, जी, हां देश के दूसरे सबसे बड़े रेड लाइट एरिया जो कि मुंबई के कमाठीपुरा इलाके में स्थित है वहां जन्मी और पली-बढ़ी मात्र 23 साल की शीतल जैन आज हमारे समाज के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है।

शीतल अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाने और समाज के सोच को गलत साबित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। आपको बता दें कि शीतल को ड्रम बजाने का काफी शौक है और एक एनजीओ की मदद से वो ड्रम बजाने की ट्रेनिंग लेने के लिए अमेरिका भी जा चुकी है।

अमेरिका में उसने लिवाइन स्कूल ऑफ म्यूजिक में ड्रम बजाने की ट्रेनिंग ली है और अभी वो एक एनजीओ में बच्चों को पढ़ाने का काम करती है।

शीतल का जीवन बचपन से ही काफी संघर्षमय रही है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए वो कहती है कि जब उसकी नानी गर्भवती थी तब उसके नाना ने उन्हें तस्करी कर कमाठीपुरा लाया था। वहां पर उसकी नानी ने एक बेटी मधु (शीतल की मां) को जन्म दिया।

मधु को बचपन में पढऩे की इज़ाज़त नहीं दी गई। जब वो तेरह साल की थी तब एक शख्स ने उसे प्यार के जाल में फसंाकर उससे शादी कर ली और जब मधु 14 साल की थी तभी उसने एक प्री-मैच्योर बेबी को जन्म दिया जिसका नाम उसने शीतल रखा।

शीतल के जन्म के कुछ दिनों के बाद ही मधु ने अपने जीवनयापन के लिए बार डांसर का काम करने लगी और फिर उसने दूसरी बार शादी की। कुछ ही दिनों में मधु ने एक बेटे (आदित्य) को जन्म दिया।

शीतल को हमेशा से ही कुछ और अलग करने की चाह थी और उसकी ये चाहत ही उसके उड़ान में पंख लगाने का काम किया। शीतल ने फिर से ये साबित कर दिया कि इंसान के हौंसले बुलंद हो, तो उसे कोई भी चीज़ नहीं रोक सकती है।