सिंगापुर में करीब तीन साल पहले प्रदूषण के स्तर ने कुछ ऐसे ही रिकॉर्ड तोड़ा था। उस समय सिंगापुर ने इस प्रदूषण को कम करने के लिए एक खास मॉडल पर काम किया था। 2013 में सिंगापुर भी धुंध और धुंए की खदर में लिपट गया था। उसके बाद सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी, शिक्षा मंत्रालय और श्रमशक्ति विभाग ने मिलकर कुछ जरूरी गाइडलाइन्स जारी की थी। ये गाइडलाइन्स खासतौर से स्कूलों और दफ्तरों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इसमें सभी स्कूलों और दफ्तरो में मास्क और एयर प्यूरीफायर उपलब्ध करवाए गए थे। सिंगापुर में ये गाइडलाइन भारत के नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स की तरह पॉल्यूशन स्टैंडर्ड इंडेक्स के हिसाब से तय की गई। इसमें पर्यावरण में प्रदूषण पहुंचाने वाले 6 जहरीली गैसों सल्फर डायऑक्साइड, पर्टिकुलेट मैटर 10, फाइन पर्टिकुलेट मैटर 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कॉर्बन मोनो ऑक्साइड और ओजोन की मात्रा को देखा जाता है।