
vicks action 500
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने डी कोल्ड, विक्स एक्शन 500 एक्स्ट्रा, कोरेक्स, बेनाड्रिल समेत 344 दवाओं पर भले ही प्रतिबंध लगाया हो, पर आप इन्हें फिलहाल खरीद सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी कि अगली सुनवाई तक सरकार का प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 344 ब्रांड की दवाओं पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। 10 मार्च को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लगाए गए प्रतिबंध का सबसे अधिक असर सर्दी-जुकाम में सबसे लोकप्रिय दवा डी कोल्ड, विक्स एक्शन 500 एक्स्ट्रा, कोरेक्स और बेनाड्रिल सहित दवाओं की करीब 6,000 ब्रांड पर पडऩे वाला है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी।
सरकार के आदेश के खिलाफ 50 दवा कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन कंपनियों में ग्लेनमार्क, अबोर्ट इंडिया, पीरामल इंटरप्राइजेज, प्रॉक्टर एंड गैम्बल शामिल हैं। इन कंपनियों ने कहा था कि सरकार ने इन दवाओं पर प्रतिबंध बिना कोई नोटिस दिए या उनके पक्ष को सुने बिना लगाया है। इनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्थगन आदेश पारित किया है।
344 दवाओं पर लगा था बैन
सरकार ने 344 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं (पैरासिटामॉल+ फिनाइलफ्रिन + कैफीन) की मैन्यूफैक्चरिंग, सेल्स और डिस्ट्रिब्यूशन पर बैन लगाया था। ये दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें बनाने में दो या दो से अधिक सॉल्ट का इस्तेमाल होता है। आरोप है कि इन दवाओं को बनाने के लिए भारत के रेफरेंस में कोई खास रिसर्च नहीं की गई है। इनके क्लीनिकल ट्रायल पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हर वर्ष 3,800 करोड़ का नुकसान
इन दवाओं पर प्रतिबंध से भारतीय दवा कंपनियों को प्रत्येक साल करीब 3,800 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। वैसे, अमरीका जैसे देशों की सख्ती के कारण भारतीय दवा कंपनियां पहले से ही काफी नुकसान उठा रही हैं। सरकार ने प्रो. चंद्रकांत कोकाते की अध्यक्षता में दवाओं के कॉम्बीनेशन पर रिपोर्ट देने के लिए जांच कमेटी बनाई थी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर इन दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की गई थी।
हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने सरकार से कोकाते कमेटी की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा है। सरकार का कहना है कि दवाओं के साइड इफेक्ट पर अधिक तत्थ्यात्मक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही कहा है कि इन दवाओं में से अधिकांश संबंधित अथॉरिटी की अनुमति के बिना ही बेची जा रही थीं। सरकार ने यह भी दलील दी है कि विकसित देशों ने अपने देशों में इन दवाओं की बिक्री की अनुमति नहीं दी है।
कई देशों में लगी रोक
दो या दो से अधिक मिश्रणों से तैयार दवाओं के शरीर पर होने वाले नुकसान को देखते हुए अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान जैसे कई देशों में इनकी बिक्री की अनुमति नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ फिक्स ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) वाली दवाइयों को लेकर सख्त है। मंत्रालय के रडार पर 1,000 से ज्यादा ऐसी दवाइयां हैं, जिन्हें दो या अधिक सॉल्ट से मिलाकर बनाया जाता है।
Published on:
22 Mar 2016 09:30 am
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