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नहीं रहे फादर ऑफ नेफ्रोलॉजी, किडनी विशेषज्ञ के तौर पर दुनिया में थे मशहूर

डॉक्टर चुघ को किडनी विशेषज्ञ के तौर पर कई बार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। केएस चुग को पद्मश्री अवॉर्ड

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ashutosh tiwari

Sep 18, 2017

Doctor Ks chugh

चंडीगढ़: भारत में 'फादर ऑफ नेफ्रोलॉजी' के नाम से मशहूर हो चुके किडनी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केएस चुघ का रविवार को निधन हो गया है। 89 साल की उम्र में चुघ ने अंतिम सास ली। आपको बता दें कि वो पिछले 2 साल से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार आज चंडीगढ़ में किया गया।

भारत ही नहीं दुनिया में भी थे मशहूर
केएस चुघ के परिवार में उनकी पत्नी और 2 लड़के हैं, जो अमरीका में डॉक्टर हैं। चुघ को भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में किडनी से संबंधित बीमारी का बेहतर इलाज करने के लिए जाना जाता था, इसीलिए उन्हें 'फादर ऑफ नेफ्रोलोजी' के नाम से भी जाना जाता था।

पीजीआई चंडीगढ़ के थे चेयरमैन
डॉक्टर चुघ पीजीआई चंडीगढ़ की एथिक्स कमेटी के चेयरमैन भी थे। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ में नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख भी रहे। बतौर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर चुघ का पुरी दुनिया में नाम था। किडनी विशेषज्ञ के तौर पर उन्हें कई बार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। केएस चुग को पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया।

कौन थे डॉक्टर के एस चुघ
डॉक्टर केएस चुघ को साल 1955 में एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में किडनी रोग में एमडी करने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से मना कर दिया गया, लेकिन फिर भी वो पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे। इसके बाद साल 1963 में पीजीआई चंडीगढ़ ज्वॉइन किया था। आगे चलकर यूनिवर्सिटी ने उनकी बात मानी और मूत्र रोग में एमडी करने की मंजूरी दी। उस वक्त नेफ्रोलॉजी शब्द का इस्तेमाल नहीं होता था।
केएस चुघ की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी ने उन्हें दुनिया के पचास श्रेष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञों की फेहरिस्त में शामिल किया, जिसपर आगे चलकर एक वीडियो फिल्म बनाई गई, जिसे वर्ल्ड नेफ्रोलॉजी लाइब्रेरी में रखा गया है।

बतौर नेफ्रोलॉजिस्ट हुए मशहूर
-डॉ. चुघ को रिनल मेडिसन में योगदान के लिए साल 2016 में उन्हें अमेरिका के सिएटल में बेल्डिंग स्क्रिबनर ट्रैलब्लेजर पुरस्कार दिया गया। वहीं अमेरिका में हुई 36वीं वार्षिक डायलिसिस कॉन्फ्रेंस में उन्हें हिमोडायलिसिस के क्षेत्र में किए गए अच्छे काम के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया।

विजयवाड़ा की एनटीआर यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद डिग्री से सम्मानित किया।