इसमें डोगरा बटालियन के 18 जवान शहीद हो गए थे। इनमें से वक्त कुछ जवानों को चंडीगढ़ जाना था। साथी जवानों की शहादत के बाद डोगरा बटालियन ने बदला लेने के लिए अपनी मूवमेंट रोक दी थी। लेकिन बटालियन 4 महीने तक वहां रुकी रही। एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि, कमांडिंग ऑफिसर ने आर्मी हेडक्वार्टर्स से निवेदन किया था कि उनके जवान विद्रोहियों पर जवाबी कार्रवाई करना चाहते हैं इसलिए मूवमेंट को कुछ महीने के लिए रोक दिया जाए।