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डोकलाम जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने बॉर्डर पर तेज किया सड़क निर्माण कार्य

इस समय भारत-चीन सीमा पर कुल 61 सड़क संबंधी प्रॉजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें से अधिकांश को 2021 तक पूरा किया जाना है।

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Mohit sharma

Sep 10, 2017

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नई दिल्ली। चीन के साथ लंबे समय तक चले डोकलाम गतिरोध के बाद भारत ने भविष्य में ऐसे चुनौतियों से पार पाने के लिए चीन से लगे बॉर्डर पर अहम रणनीतिक इलाकों में सड़क बनाने के काम को तेज कर दिया है। इसी के चलते ऊंचाई पर स्थित रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण समझी जाने वाली कई सड़कों के निर्माण को 2020-21 की निर्धारित तिथि से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।

भारत-चीन बॉर्डर पर 61 रोड प्रोजेक्ट्स

बता दें कि इस समय भारत-चीन सीमा पर कुल 61 सड़क संबंधी प्रॉजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें से अधिकांश को 2021 तक पूरा किया जाना है। अब भारत सरकार ने डोकलाम जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की वित्तीय शक्ति में इजाफा कर दिया है। सरकार की ओर से यह कदम सड़क निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए किया गया है। हालांकि पिछले 2-3 सालों में बॉर्डर पर सड़क निर्माण कार्यों मे तेजी देखने को मिली है। बता दें कि दुर्गम क्षेत्रों में सड़क निर्माण का काम साल में मुश्किल से 4 से 6 महीने ही ठीक से ही चल पाता है।

पूरे हो चुके 27 प्रॉजेक्ट्स

जानकारी के मुताबिक बीआरओ के पास फिलहाल चीन सीमा पर 3,400 किलोमीटर के 61 रोड प्रॉजेक्ट्स हैं। इनमें से 27 प्रॉजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं और शेष 34 में से 21 के कनेक्टिविटी वर्क को पूरा कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था के अंतर्गत अब बीआरओ के अधिकारी 100 करोड़ रुपये तक के प्रॉजेक्ट को खुद मंजूरी दे सकते हैं। बता दें कि इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी न होने के कारण कई जगहों से स्थानीय लोगों के चीन की ओर पलायन की खबर भी आती रहती हैं, जो सरकार की चिंता को और बढ़ा देती हैं। वहीं इसके साथ ही चीनी घुसपैठ की आशंका भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि सरकार ने इन कामों में तेजी लाने की जरूरत पर बल दिया है।

कैग ने की थी आलोचना

इसके अलावा कैग ने चीनी सीमा पर सड़क निर्माण की धीमी गति के कारण भारत सरकार की यह कहकर आलोचना की थी कि अभी तक केवल 27 प्रॉजेक्ट्स को ही पूरा किया जा सका है। वहीं राज्यों को फॉरेस्ट क्लियरेंस के लिए एक तय समय सीमा के भीतर फैसला लेने के अधिकार दिए जाने से भी बीआरओ को काफी मदद मिली है।

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