Earthquake: दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप के झटके, तजाकिस्तान में 6.3 मापी गई तीव्रता

  • Earthquake दिल्ली समेत उत्तर भारत में शुक्रवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए
  • भूकंप के झटकों से थर्राए देश के कई राज्य
  • तजाकिस्तान में 6.3 मापी गई तीव्रता

नई दिल्ली। भूकंप ( Earthquake ) के झटकों से एक बार फिर दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाके देर रात थर्रा उठे। वहीं ताजिकिस्तान में भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों से बाहर निकल पड़े. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान में था।

दरअसल पहले ये बात सामने आई कि भूकंप का दूसरा केंद्र पंजाब के अमृतसर के पास था। नेशनल सेंटर फॉर सेस्मोलॉजी की ओर जानकारी दी गई कि अमृतसर में रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.1 है, लेकिन बार में मौसम विभाग ने इससे इनकार कर दिया।

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इन राज्यों में भी दिखा भूकंप का असर
भूकंप का असर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में देखने को मिला। इनमें हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
भूकंप भारतीय समयानुसार 10:34 PM बजे सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में आया। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जान माल के नुकसान की तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

केजरीवाल ने की प्रार्थना
दिल्ली और आस पास के इलाकों में भी कई सेकेंड तक काफी तेज झटके महसूस किए गए. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, 'दिल्ली में भूकंप के झटके, सभी की सलामती के लिए प्रार्थना करता हूं।'

उमर अब्दुल्ला ने भी किया ट्वीट
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके कहा कि 2005 के बाद इतनी तीव्रता के भूकंप को महसूस किया. जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हुए मैं घर के बाहर आ गया।

कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने भी भूकंप के ज़ोरदार झटके महसूस किए. उन्होंने एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, "कयामत से क्या डरे कोई, अब कयामत भी रोज़ आती है. एक बार फिर दिल्ली में भूकम्प के झटके महसूस हुए..उम्मीद है सभी लोग महफ़ूज़ होंगे।"

आपको बता दें कि हिमाचल के चंबा ,डलहौजी व अन्य इलाकों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. ऊना में भी भूकंप के आंशिक झटके महसूस किए गए।

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इसलिए आता है भूकंप
हमारी धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट. क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं।

ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है।

ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

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धीरज शर्मा
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