अनशन पर अन्नदाताः चौथे दिन पड़ा असर, देश के कई इलाकों में बढ़ने लगे फल-सब्जी के दाम

किसानों की देशव्यापी हड़ताल का चौथे दिन दिखाई देने लगा असर। देश के कई इलाकों में बड़े फल-सब्जियों के दाम। महाराष्ट्र में ट्रेडर्स को नहीं आई कोई मुश्किल...

नई दिल्ली। स्वामीनाथ रिपोर्ट को लागू करने और किसानों की स्थिति में सुधार जैसी मांगों को लेकर 10 दिन की हड़ताल पर बैठे अन्नदाताओं ने चौथे दिन भी कई जगह फल-सब्जियों और दूध की सप्लाई रोकी। देशभर में अब किसानों इस हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में सब्जी और फलों के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि पिछले तीन दिनों से अभी तक किसानों ने शांतिपूर्वक आंदोलन किया है।


पंजाब-हरियाणा में ज्यादा असर
किसानों ने पंजाब और हरियाणा में विरोध जताते हुए रविवार को सड़कों पर सब्जियां फेंकी। इसके कारण शहरों में सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। देश के 22 राज्यों में कई किसान संगठन संयुक्त रुप से प्रदर्शन कर रहे हैं।


महाराष्ट्र में ट्रेडर्स बोले कोई असर नहीं
महाराष्ट्र के ट्रेडर्स ने किसानों की देशव्यापी हड़ताल को अब तक बेअसर बताया है। उनका कहना है कि पिछले तीन दिन में फल-सब्जी और दूध को लेकर किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आई है और ना ही यहां अब तक इनके दामों में बढ़ोतरी हुई है। पुणे स्थित ट्रेडर्स का कहना है कि 'किसान अवकाश' का हमारे यहां कोई फर्क नहीं पड़ा है। न तो बिजनेस पर और न ही बाजार पर।

 

मध्यप्रदेश में 'मीठा' विरोध
किसानों की हड़ताल का असर मध्यप्रदेश में कुछ अलग तरह से पड़ रहा है। यहां के किसान सब्जी और फलों को सड़कों पर बिखेरने की बजाय दूध की खीर बनाकर लोगों में बांट रहे हैं। यानी यहां विरोध तो हो रहा लेकिन 'मीठा'। वहीं लोगों की माने तो तीन दिन से चल रही हड़ताल की वजह से सप्लाई पर तो ज्यादा असर नहीं पड़ा है लेकिन हां दामों में थोड़ी बढोतरी देखने को मिल रही है, जो आगे चलकर और भी बढ़ सकती है। राजस्थान में भी ग्रामीणों ने किसानों को खीर, पूड़ी, सब्जी खिलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। राजावास में किसान नेता मोहन परसवाल ने बताया सड़क पर दूध और सब्जी को बिखेरा जाता है तो वह किसी के काम नहीं आएगा। ऐसे में पशुपालकों ने फैसला किया कि जब तक आंदोलन चलेगा, तब तक गांव में खीर पूड़ी और सब्जी बांटते रहेंगे।

मेरठ में बिगड़े हालात
गांव बंद किसान हड़ताल पर आंदोलन का असर अब मेरठ में भी पहुंच गया है। भारतीय किसान आंदोलन की अगुवाई में किसानों ने कमिश्नरी चौराहे पर सब्जी बिखेर दी। नारेबाजी करते हुए किसानों के हक में आवाज बुलंद की। उपज का वाजिब दाम, कर्जमाफी और फसलों के दाम लागत मूल्य पर 50 फीसदी जोड़कर देने की मांग उठाई।


सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम
मेरठ समेत वेस्ट यूपी के तमाम इलाकों युवा सोशल मीडिया में मुहिम चला रहे हैं। एक तरफ जहां देश के किसान संगठन इन 10 दिनों में गाँवों से खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति न करने पर अड़े हैं, वहीं सरकार ने इससे निपटने की कोशिशें भी तेज कर दी हैं।सोशल मीडिया में चल रही मुहिम के मुताबिक गाँव बंद के दौरान एक जून से 10 जून तक किसान अपने उत्पादन, फल, सब्जी, दूध और अनाज समेत दूसरे उत्पाद शहर नहीं भजेंगे।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 130 संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है. किसानों का यह 10 दिवसीय आंदोलन सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर किया गया है। किसान अपनी उपज के लिए लाभकारी दाम, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने एवं कृषि ऋण माफ करने की मांग कर रहे हैं।

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धीरज शर्मा
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