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पिता करता है मजदूरी और बेटा गूगल में जॉब! एक पिता और उसके बेटे की प्रेरणात्मक कहानी

आज हम आपको जिस मजदूर पिता और उसके बेटे की जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो उन तमाम कहावत का खंडन करती है जिनमें कहा जाता है कि एक मजदूर का बेटा मजदूर ही बनता है..

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Rahul Mishra

Dec 21, 2016

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father is a labourer son in google this is an inspiration story

एक कहावत है कि अगर कोई इंसान ठान ले कि उसे ज़िंदगी में सफलता हासिल करनी है तो उसकी गरीबी भी उसके आड़े नहीं आ सकती और एक पिता के लिए इससे बड़ी गर्व की बात और क्या हो सकती है कि जिस बेटे को उसने मजदूरी कर पढ़ाया लिखाया, आज वो बेटा उसका नाम दुनिया में रौशन कर रहा है। आज हम आपको जिस मजदूर पिता और उसके बेटे की जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो उन तमाम
कहावत
का खंडन करती है जिनमें कहा जाता है कि एक मजदूर का बेटा मजदूर ही बनता है।


ये प्रेरणात्मक कहानी है राजस्थान के शहर सोजात में के निवासी तेजराम और उनके बेटे राम चंद्र की। पिता तेजराम शंखला मेहंदी की बोरियां ट्रकों पर चढ़ाने की मजदूरी करते हैं और उनका बेटा राम दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक गूगल में काम करता है।


पड़ोसियों की मदद और पिता की रही मेहनत-

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राम ने साल 2008 में सरकारी ​हिन्दी ​माध्यम स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास कर कोटा कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला ​लिया। अपनी पढाई और पिता की मजदूरी से साल 2009 में आईआईटी रुड़की में उनका एडमिशन हो गया। राम के अनुसार एडमिशन की काउंसिलिंग और पहले सेमेस्टर की फीस सोजात के ही उनके एक पडोसी ने दी।


गूगल में काम कर रहे राम के अनुसार उसी व्यक्ति ने उन्हें एक सूटकेस और कुछ कपड़े भी खरीद के दिए। बाद में उनके समाज के कुछ लोगों ने उन्हें 30,000 का लैपटॉप खरीद कर दिया। राम अपनी कामयाबी का श्रेय पिता को देते हुए कहते हैं कि पिता ने उनकी पढाई के लिए बहुत मेहनत की, वो दिन-रात मजदूरी किया करते थे, पिता ने ही दूसरे सेमेस्टर की फीस देने के लिए लोन लिया, उसके बाद दूसरे साल में मुझे ​एजूकेशन लोन मिल गया, जिससे मेरी आगे की पढ़ाई हो गई।

हॉलीवुड फिल्मों से सीखी अंग्रेजी-
राम के अनुसार उनकी अंग्रेज़ी कमज़ोर थी, जिसे उन्होंने हॉलीवुड अंग्रेजी फ़िल्मों के सबटाइटल्स पढ़ कर और उसे बोल-बोल कर सुधारा। वो नहीं चाहते थे कि कोई भाषा उनकी तरक्की के आड़े आए।

साल 2013 में राम की Google में नौकरी लग गई थी और इस साल वो अमेरिका, Google के Seattle आॅफ़िस शिफ़्ट हो गए।
राम ने अपने पिता से मजदूरी का काम छोड़ने को कहा, पर उनका कहना है कि मैं बिना काम किए रह नहीं सकता। राम की मां भी पहले कंस्ट्रक्शन साइट पर मज़दूरी करती थीं, जो कि अब अपनी 1.5 एकड़ ज़मीन की देख-रेख करती हैं। ये राम की सैलरी से खरीदी गई थी।


राम ने अब तक अपने पिता द्वारा लिया गया सारा कर्ज़ चुका दिया है। राम ने उनके भी पैसे लौटाने चाहे जिन्होंने पढ़ाई के लिए उसकी आर्थिक मदद की थी, लेकिन उन्होंने वो पैसे लेने से इंकार कर दिया और किसी ज़रूरतमंद की मदद करने को कहा।

राम का कहना है कि वो बस उतने पैसे कमाना चाहते हैं, जिससे उनके आर्थिक हालात स्थिर हो सकें। बाद में वो सोजात वापस आ कर अपने परिवार के साथ रहेंगे और समाज सेवा करेंगे।