चारा घोटाला: एक नजर में जानिए कब क्या हुआ?

चारा घोटाला: एक नजर में जानिए कब क्या हुआ?

Anil Kumar | Publish: Mar, 15 2019 02:38:03 AM (IST) | Updated: Mar, 15 2019 10:21:50 AM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

  • चारा घोटाले के आरोप में रांची की जेल में बंद हैं लालू प्रसाद यादव।
  • करीब 900 करोड़ रुपए का चारा घोटाला करने का है आरोप।
  • चारा घोटाले के तीन अलग-अलग मामलों में मिल चुकी है सजा।

नई दिल्ली। चारा घोटाले से संबंधित तीन मामलों में आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट जमानत के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ झारखंड हाईकोर्ट के 10 जनवरी के फैसले को चुनौती देने वाली लालू यादव की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

झारखंड हाईकोर्ट ने तीनों मामलों में लालू को जमानत दी थी। जमानत के लिए दायर याचिका में लालू ने खराब सेहत का हवाला दिया था। बता दें कि चारा घोटाले से जुड़े अलग-अलग तीन मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही सजा मिल चुकी है। अभी वह दिसंबर 2017 से रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या है यह पूरा मामला..

चारा घोटाला: लालू प्रसाद यादव को नहीं मिली जमानत, झारखंड हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज

- वर्ष 1996 में पहली बार चारा घोटाले का पर्दाफाश हुआ। जिसमें यह बात सामने आई कि सरकार ने जानवरों के लिए चारा, दवाएं और पशुपालन से जुड़े उपकरणों को लेकर बहुत बड़े घोटाले को अंजाम दिया। सबसे बड़ी बात कि इसमें कई नौकरशाह, नेता और व्यापारी भी शामिल थे।

- करीब 900 करोड़ रुपए के इस घोटाले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया।

- इस मामले की जांच करते हुए सीबीआई ने पहली बार खुलासा किया कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव भी संलिप्त हैं। इस खुलासे के बाद 10 मई 1997 को सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से लालू के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। सबसे हैरानी की बात यह कि इसी दिन इस मामले से जुड़े एक व्यापारी हरीश खंडेलवाल एक रेल पटरी पर मृत पाए गए। जिसके बाद से घोटाले का संदेह और भी गहराने लगा।

- सीबीआई ने जांच के लिए राज्यपाल से हरी झंडी मिलते ही 17 जून 1997 को बिहार सरकार के पांच बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया। इसमें महेश प्रसाद, के अरुमुगम, बेक जुलियस, फूलचंद सिंह और रामराज राम के नाम शामिल हैं।

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- जांच की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाते हुए सीबीआई ने लालू यादव के अलावा अन्य 55 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की। इसमें जगन्नाथ मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा का नाम भी शामिल था। हालांकि कोर्ट ने जगन्नाथ मिश्रा को अग्रिम जमानत दे दी लेकिन लालू की याचिका खारिज हो गई।

- लालू ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई और जमानत के लिए अर्जी लगाई, लेकिन 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने लालू को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।

- करीब पांच महीने (135 दिन) जेल में रहने के बाद 12 दिसंबर 1997 को लालू प्रसाद जेल से बाहर आए। लेकिन वह ज्यादा दिन तक बाहर नहीं रह सके और एक बार फिर से 28 अक्टूबर 1998 को चारा घोटाले के ही एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिए गए। उन्हें पटना की बेऊर जेल में रखा गा। फिर से वे जमानत पर बाहर आ गए।

- लालू यादव को 5 अप्रैल 2000 को एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उन्हें 11 दिन तक जेल में गुजारने पड़ाे

- इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा से वर्ष 2000 में कई बार पूछताछ की। जांच प्रक्रिया आगे बढ़ती गई और 2007 में 58 पूर्व अधिकारियों और सप्लायरों को दोषी ठहराया गया। सभी को 5-6 वर्ष की सजा सुनाई गई। जांच करते हुए सबूतों को इकट्ठा करने के बाद 16 वर्ष बाद यानी एक मार्च 2012 को सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्रा और जनता दल-यू के जहानाबाद से सांसद जगदीश शर्मा समेत 31 लोगों के खिलाफ़ फर्जी बिलों के सहारे बांका और भागलपुर कोषागार से 46 लाख रुपए निकालने के मामले में आरोप तय कर दिए।

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- इस मामले से जुड़े 53 मामलों में से 44 की सुनवाई वर्ष 2013 में पूरी कर ली गई। इसमें पांच सौ से अधिक लोगों को दोषी पाया गया। निजली अदालतों ने सभी को सजा भी सुनाई। हालांकि 2013 के अक्टूबर में ही चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में 37 करोड़ रुपए गबन करने के मामले में लालू यादव को दोषी करार दिया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से इस बार उन्हें जमानत मिल गई।

बता दें कि 30 सितंबर, 2013 को अदालत ने चारा घोटाले में फैसला सुनाया था। चारा घोटाले में 17 साल बाद आए फैसले में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत 45 लोगों को दोषी करार दिया गया था। इनके अलावा मुख्य आरोपियों में आईएएस अफसर महेश प्रसाद, फूलचंद सिंह, बेक जूलियस, के अर्मुगम और आयकर अधिकारी एसी चौधरी, पशुधन विकास मंत्री-विद्या सागर निषाद, आर के राणा और ध्रुव भगत भी शामिल थे।

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