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कठुआ गैंगरेप केस में फॉरेसिंक लैब का खुलासा: आरोपी और पीड़िता से लिए गए सैंपल मैच

कठुआ रेप और मर्डर मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जांच में रेप पीड़िता और आरोपी के अंगों से मिले सैंपल मैच कर गए है।

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kathua rape case

जम्मू। कठुआ रेप मामले में एक नया खुलासा हुआ है। अभियुक्त के अंग के नमूने पीड़िता के अंग से स्वैब के माध्यम से लिए गए नमूने से मैच कर गए हैं। फोरेंसिक प्रयोगशाला की जांच में यह खुलासा हुआ है। प्रयोगशाला ने यह भी पुष्टि की कि अभियुक्त के डीएनए नमूने पुलिस द्वारा एकत्रित मृत लड़की के शरीर के नमूने से मैच कर गए हैं।

बालों और खून के नमूने मैच

दिल्ली की एक फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने पुष्टि की है कि कठुआ रेप एंड मर्डर कांड में आठ साल की बच्ची के अंग से मिला स्वैब सैंपल आरोपी के साथ मेल खाते हैं। यह इस मामले में सबसे मजबूत प्रमाणों में से एक है जो पीड़िता के उत्पीड़न को उजागर करता है। दिल्ली की फॉरेंसिक लैब ने मृत लड़की के शरीर से इकट्ठे किये गए सभी साक्ष्यों के 14 नमूने लिए थे जिसमें पीड़िता के निजी अंग के स्वैब, अंगों के बालों के नमूने, रक्त, आरोपियों के रक्त नमूने, मृत बच्ची का विसरा उसके कपडे, घटनास्थल की मिट्टी और मिटटी पर पड़े खून के नमूने आदि को जांच के लिए भेजा गया था।

एक वरिष्ठ एफएसएल अधिकारी ने कहा कि प्रयोगशाला ने नमूने का परीक्षण किया और उन्हें बलात्कार के लिए सकारात्मक पाया। प्रयोगशाला ने यह भी पुष्टि की कि आरोपी के डीएनए नमूने पुलिस द्वारा एकत्र किए गए लोगों से मेल खाते हैं।फोरंसिक लैब परीक्षणों की रिपोर्ट 3 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर पुलिस अपराध शाखा को सौंपी गई थी। अधिकारियों ने कहा कि आरोपी के डीएनए के साथ पीड़िता के नमूनों का मिलान विशेष तरीके से किया गया था। दिल्ली में एक गृह विभाग केएक अधिकारी ने बताया कि, "बालों के झुंड में से एक आरोपी के डीएनए से मेल खता है जबकि दूसरा लड़की के साथ मेल खाता है। लड़की के कपड़ें पर पाए गए खून के दाग भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे। फ्रॉक पर मौजूद ज्यादातर सबूत नष्ट हो गए थे क्योंकि इसे डिटर्जेंट से धोया गया था, लेकिन खून का धब्बा नहीं मिटाया जा सका था।

बात दें कि दिल्ली स्थित एफएसएल आम तौर पर बाहरी मामलों को नहीं लेता है क्योंकि उन्हें एक ही मामले के लिए पूरी टीमों को समर्पित करना होता है। इस मामले में साक्ष्य की जांच के लिए एफएसएल के डीएनए विभाग से आठ सदस्यों की एक टीम बनाई गई थी।

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