
Former chief secretary Neera Yadav
इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव की जमानत याचिका खारिज कर देने और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के वरिष्ठ अधिकारी राजीव कुमार की भ्रष्टाचार के आरोप में मिली सजा को बहाल रखने से अब दोनों का जेल जाना लगभग तय है। दोनों अधिकारियों को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की गाजियाबाद स्थित विशेष अदालत ने 20 नवम्बर 2012 को भ्रष्टाचार के मामले में 3-3 वर्ष की कठोर कैद व जुर्माने की सजा सुनायी थी।
दोनों पर आरोप था कि उन्होंने नोएडा में अपने कार्यकाल के दौरान वृहद स्तर पर प्लांट आवंटन में घोटाला किया था। न्यायमूर्ति हर्ष कुमार की एकल पीठ ने सीबीआई अदालत के दस्तावेजों का अध्ययन करने और सम्बन्धित पक्षकारों को सुनने के बाद राजीव कुमार की अपील खारिज करते हुए कहा कि इन पर लगे आरोप साबित हो चुके हैं और ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर सजा निरस्त की जा सके।
पीठ ने पूर्व मुख्य सचिव की जमानत याचिका भी निरस्त कर दी। पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव व सीनियर आईएएस अधिकारी नोएडा में क्रमश: अध्यक्ष और उप मुख्य अधिशासी अधिकारी के रुप में तैनात थे। इन दोनों पर पद का दुरूपयोग करते हुए प्लाटों के आवंटन में व्यापक अनियमितता के आरोप लगे थे।
सीबीआई ने प्रकरण की जांच कर दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था और उसके बाद सीबीआई की विशेष अदालत में मुकदमा चला जहां आरोप सिद्ध होने पर दोनों को भ्र्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13 (1)(डी) तथा 13 (2) के तहत तीन वर्ष का सश्रम कारावास व जुर्माने की सजा सुनायी थी।
इस बीच, राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय का निर्णय आते ही राजीव कुमार को प्रबन्धन एकेडमी के महानिदेशक पद से तत्काल हटा दिया। इससे पहले करीब चार वर्षो तक नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद से तीन दिन पहले ही इन्हें हटाकर एकेडमी के महानिदेशक पद पर भेजा गया था।
Published on:
25 Feb 2016 12:30 am
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