एमएससी के बाद की पीएचडी
राव ने बीएचयू से एमएससी की पढ़ाई के बाद महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के निदेर्शों में गुजरात विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। उनके काम से प्रभावित होकर सरकार ने अंतरिक्ष विज्ञान में अहम योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
1960 से की करियर की शुरुआत
राव ने 1960 में अपने करियर की शुरुआत से ही भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास में और संचार के क्षेत्र में एवं प्राकतिक संसाधनों का दूर से पता लगाने में इस तकनीक के अनुप्रयोगों में अहम योगदान दिया है।
1984 में बनें अंतरिक्ष विभाग के सचिव
वर्षं 1984 में राव अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने रॉकेट प्रौद्योगिकी के विकास में तेजी लाई, जिसके चलते एएसएलवी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण हुआ और साथ ही दो टन तक के उपग्रहों को धुव्रीय कक्षा में स्थापित कर सकने वाले पीएसएलवी का भी सफल प्रक्षेपण संभव हो सका। यूआर राव ने वर्ष 1991 में क्रायोजेनिक तकनीक और भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के विकास की पहल भी की।