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प्रणब मुखर्जी ने मौजूदा हालात पर जताई चिंता, कहा- बढ़ती असहिष्णुता के दौर से गुजर रहा देश

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश का अधिकांश धन अमीरों की जेब में जाने से अमीरों और गरीबों के बीच खाई बढ़ती जा रही है।
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नई दिल्ली

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Shiwani Singh

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Updated: 24 Nov 2018, 9:44 AM IST

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प्रणब मुखर्जी ने मौजूदा हालात पर जताई चिंता, कहा- बढ़ती असहिष्णुता के दौर से गुजर रहा देश

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी देश में बढ़ती असहिष्णुता और मानवाधिकारों के हनन पर चिंता जारी की है। उन्होंने कहा कि देश का अधिकांश धन अमीरों की जेब में जाने से अमीरों और गरीबों के बीच खाई बढ़ती जा रही है। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति ने ये बातें शुक्रवार को दिल्ली में गुरुनानक देव की 549वीं जयंती पर आयोजित एक सम्मेलन में कहीं। 'शांति, सदभाव व प्रसन्नता की ओर : संक्रमण से परिवर्तन' विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन और सेंटर फॉर रिसर्च फॉर रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट द्वारा किया गया था।

कार्यक्रम में बोलते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा, 'जिस देश ने दुनिया को 'वसुधव कुटुंबकम' और सहिष्णुता का सभ्यतामूलक लोकाचार, स्वीकार्यता और क्षमा की अवधारणा प्रदान की, अब वहां बढ़ती असहिष्णुता, गुस्से का इजहार और मानवाधिकरों के अतिक्रमण की खबरें आ रही हैं।' उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र बहुलवाद और सहिष्णुता का स्वागत करता है और विभिन्न समुदायों में सद्भाव को प्रोत्साहन देता है, हम नफरत के जहर को साफ करते हैं और अपने दैनिक जीवन में ईष्र्या व आक्रमकता को दूर करते हैं तो वहां शांति और भाईचारे की भावना आती है।

व्यक्तिगत सुरक्षा से खुश रहते हैं लोग

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन देशों में अधिक खुशहाली होती है जो अपने निवासियों के लिए मूलभूत सुविधाएं व संसाधन सुनिश्चित करते हैं, अधिक सुरक्षा देते हैं, स्वायत्ता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जहां व्यक्तिगत सुरक्षा की गारंटी होती है और लोकतंत्र सुरक्षित होता है वहां लोग अधिक खुश रहते हैं। वहीं, आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इन आंकड़े की उपेक्षा की जाएगी तो प्रगतिशील अर्थव्यवस्था में भी हमारी खुशियां कम हो जाएंगी। हमें विकास के प्रतिमान पर शीघ्र ध्यान देने की जरूरत है।

अखबारों में जो छपता वह पीड़ादायक

शांति, सौहार्द और खुशहाली पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि हम ऐसे वक्त में इस कान्फ्रेंस का आयोजन कर रहे हैं जब देश कई सारी मुसीबतों से जूझ रहा है। हर सुबह अखबारों में जो छपता है वह काफी पीड़ादायक है। अखबारों की हेडलाइन में अधिकतर गुस्सा, अहिंसा और नफरत की खबरों से भरे हुए होते हैं।

कैसे आए खुशहाली

मुखर्जी ने सवाल करते हुए पूछा कि क्या संविधान की प्रस्तावना का अनुपालन हो रहा है जो सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक न्याय, अभिव्यक्ति की आजादी और चिंतन, दर्जा और अवसर की समानता की गारंटी देती है।मुखर्जी ने बताया कि वल्र्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2018 के मुताबिक खुशहाली के मामले में 158 देशों में भारत का स्थान 113वां है। वहीं ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 119 देशों में भारत का स्थान 103 है। देश में 14.6 फीसदी कुपोषण के मामले हैं जबकि भारत में आत्महत्या की दर 17 फीसदी है। लैंगिक असमानता के सूचकांक में भारत 188 देशों की सूची में 125वें स्थान पर है। वहीं आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक के मामले में भी 180 देश की सूची में भारत का स्थान 130वां है। मानव विकास सूचकांक में 189 देशों में भारत का स्थान 130वें पायदान पर है। भारत में चौथे स्तंभ का भी हाल बुरा है जहां प्रेस की आजादी के मामले में 180 देशों के समूह में भारत का स्थान 140वां है। साथ ही देश में शिक्षा व्यवस्था में 191 देशों में हम 145 वें स्थान पर हैं। देश में 22 फीसदी आबादी अभी भी गरीबी रेखा ने नीच रह रही है। यह सब बताता है कि खुशहाली का सूचकांक घटता ही जा रहा है।

प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी निहित होती है

वहीं, कार्यक्रम के दौरान गुरुनानक देव की 549वीं जयंती पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि आज उनके शांति और एकता के संदेश को याद करना आवश्यक है। उन्होंने चाणक्य की सूक्ति को याद करते हुए कहा कि 'प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी निहित होती है।' उन्होंने कहा कि ऋग्वेद में कहा गया है कि हमारे बीच एकता हो, स्वर में संसक्ति और सोच में समता हो।