मुंबई: अगर कोई ठान ले कि उसे हर हाल में सफल होना है, सामने चाहे गरीबी की दिव्वार ही क्यों न हो! तो सफलता भी उसके कदम चूमती है। मेहनत के दम पर किस तरह सफलता की ऊंची उड़ान भरी जा सकती है, यह मिसाल ऑटो रिक्शा ड्राइवर से हवाई जहाज के पायलट बनने वाले श्रीकांत पंतवणे ने कायम की है।
पायलट बनने से पहले ऑटो ड्राइवर रहे श्रीकांत पंतवणे की पिता सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। श्रीकांत ने अपने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए डिलीवरी बॉय के तौर पर अपनी पहली शुरुआत की थी।