28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक ऑटो ड्राइवर की प्रेणात्मक कहानी, डिलीवरी बॉय से ऑटो ड्राइवर और अब बना एयरक्राफ्ट पायलेट!

खुले गगन में उड़ान भरने का श्रीकांत का सपना उस समय पूरा हुआ जब किफायती एयरलाइन इंडिगो में उनका चयन हुआ। श्रीकांत अब इंडिगो में फस्र्ट ऑफिसर हैं जिसको सेकंड पायलट या सहायक पायलट भी कहा जाता है..

2 min read
Google source verification

image

Rahul Mishra

Jan 02, 2017

From A Delivery Boy To An Auto-Driver And Now A Pi

From A Delivery Boy To An Auto-Driver And Now A Pilot, Here's Shrikant Pantawane's Inspirational Story!

मुंबई: अगर कोई ठान ले कि उसे हर हाल में सफल होना है, सामने चाहे गरीबी की दिव्वार ही क्यों न हो! तो सफलता भी उसके कदम चूमती है। मेहनत के दम पर किस तरह सफलता की ऊंची उड़ान भरी जा सकती है, यह मिसाल ऑटो रिक्शा ड्राइवर से हवाई जहाज के पायलट बनने वाले श्रीकांत पंतवणे ने कायम की है।

पायलट बनने से पहले ऑटो ड्राइवर रहे श्रीकांत पंतवणे की पिता सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। श्रीकांत ने अपने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए डिलीवरी बॉय के तौर पर अपनी पहली शुरुआत की थी।

Image result for From A Delivery Boy To An Auto-Driver And Now A Pilot, Here's Shrikant Pantawane's Inspirational Story!
कुछ दिनों के बाद उन्होंने वो नौकरी छोड़ दी और ऑटो रिक्शा चलाने लगे। बहुत ही छोटी सी उम्र में परिवार का भार उठाने वाले श्रीकांत ने अपनी जॉब और पढाई के बीच सामंजस्य बिठा कर परिवार की मदद की।

कठिन मेहनत, बाधाएं और वित्तीय संघर्ष ने उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए कभी भी हतोत्साहित नहीं होने दिया। श्रीकांत अब भी 3 पहिये का वाहन ही चलाएंगे लेकिन वो ऑटो रिक्शा नहीं, बल्कि एक एयरक्राफ्ट है।

Shrikant Pantawane drives the auto while studying for 12th
एक बार एयरपोर्ट पर डिलिवरी देने गए श्रीकांत की बातचीत चाय स्टॉल के वेंडर से हुई। वहां श्रीकांत को पता चला कि एविएशन रेग्युलेटर डीजीसीए यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन पायलट स्कॉलरशिप प्रोग्राम चला रहा है।

इसके बाद श्रीकांत ने अपनी 12वीं क्लास की सारी किताबें उठाई और स्कोलरशिप की तैयारियों में जुट गए। 12 वीं का परिणाम घोषित होते ही श्रीकांत ने मध्यप्रदेश के फ्लाइट स्कूल को ज्वाइन कर लिया लेकिन यहाँ उन्हें उनकी इंग्लिश पर अच्छी पकड़ न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।

Shrikant Pantawane
श्रीकांत ने इस बाधा को भी को चैलेंज के रूप में स्वीकार किया और उस बाधा को अपने एक दोस्त की मदद से पार कर लिया।

प्रशिक्षण के बाद भी श्रीकांत को कुछ समय तक उड़ान भरने के अपने सपने को हकीकत में बदलने का इंतजार करना पड़ा। मार्केट में नरमी होने के कारण कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) मिलने के बाद उनको कुछ दिनों तक कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करना पड़ा।

खुले गगन में उड़ान भरने का श्रीकांत का सपना उस समय पूरा हुआ जब किफायती एयरलाइन इंडिगो में उनका चयन हुआ। श्रीकांत अब इंडिगो में फस्र्ट ऑफिसर हैं जिसको सेकंड पायलट या सहायक पायलट भी कहा जाता है।

ये भी पढ़ें

image
Story Loader