
2018 के एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक दिलाने वाली खिलाड़ी पानी को मोहताज
नई दिल्ली. खेल किसी भी खिलाड़ी के लिए भाग्य बदलने का काम करता है। क्रिकेट, फूटबॉल, दौड़ आदि खेल में ऐसे कई उदाहरण देखे गए हैं जब कोई खिलाड़ी गरीबी से अमीरी तक पहुंचा है तो कुछ ऐसे भी बड़े नाम रहे हैं जो अच्छी शुरुआत करने के बाद आज परिवार का गुजारा करने तक को मोहताज हैं। एक एेसा ही नाम है गोल्ड मेडलिस्ट (gold medalist ) सरिता गायकवाड़ का। सरिता गायकवाड़ (Sarita Gaikwad) ने 2018 के एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। सरिता गायकवाड़ (Sarita Gaikwad) डांग ज़िले के अहवा की रहने वाली हैं और हर दिन पानी (water crisis) लेने के लिए एक किलोमीटर की पदयात्रा करती हैं।
गांव छोड़ कर जा रहे हैं लोग
गुजरात का डांग (Dang of gujarat) ज़िला एेसा है जहां खासक गर्मियों में पानी का संकट मंडराया करता है। पानी के काम से पूर्व यहां के लोग पानी के अभाव में गांव छोड़कर बाहर जाने को मजबूर हो गए है। इस विषय पर खिलाड़ी सरिता गायकवाड़ ने बताया कि उनके गांव में पानी की बहुत ही समस्या हैं। वे अपने गांव से एक किलोमीटर दूर से पानी भर कर लाती है। पानी की समस्या इतनी ज्यादा है कि लोग गांव छोड़-छोड़ कर जा रहे हैं।
गर्मी में बढ़ जाती है पानी की समस्या
उनके पिता लक्ष्मणभाई ने बताया कि डांग जिले में बारिश तो बहुत होती है। इसके बाद भी यहां गर्मी में पानी की बहुत ही समस्या होती है। यहां सरकार की तरफ से डैम बनाने का काम शुरू हुआ है, लेकिन अभी तक खत्म नहीं हुआ है। अधिकारी भी कोई ध्यान नहीं देते हैं।
जानिए, कौन है सरिता गायकवाड़
बता दें कि सरिता गायकवाड़ को 2018 में 400 मीटर की दौड़ के लिए भारतीय महिला टीम में चयन किया गया था। वह गुजरात से चयनित होने वाली पहली महिला खिलाड़ी थी। उसने 400 मीटर रिलेदौड़ में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। इसमें देश की अन्य तीन महिला खिलाड़ियों में एमआर पूवम्मा, हिमा दास और वीकेविस्मया भी शामिल थी। अंतिम दौर की स्पर्धा में सरिता गायकवाड़ ने स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत से कामन वेल्थ गेम में भारत देश का नाम रोशन हुआ। वह गुजरात सरकार के बेटी बचाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी है।
गुजरात को विश्व में सम्मान दिलाने वाली सरिता गायकवाड़ कई बड़ी हस्तियों के साथ मुलाकात कर चुकी हैं। राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित विश्व प्रसिद्ध लोगों के साथ उनकी तस्वीरें हैं। लेकिन इन सबके बावजूद यह दुख की बात है कि अपने गांव में जाने पर उसे एक किलोमीटर दूर से पेयजल लाना पड़ता है। वह भी जंगली रास्तों से ही गुजर कर।
Updated on:
11 Jun 2020 04:57 pm
Published on:
11 Jun 2020 04:41 pm
बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
