
नई दिल्ली। कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ जारी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई के बीच अब सरकार के शीर्ष स्तर पर डायलॉग को लेकर विचार मंथन शुरू हो गया है। अलगाववादियों से बात करने को लेकर भले ही कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ हो मगर सरकार की कोशिश है कि दबाव बनाकर बातचीत की टेबल पर बिना शर्त बातचीत के लिए आने को लेकर उनको मजबूर कर दिया जाएं।
नरम नहीं पडना चाहती सरकार
गृह मंत्रालय के सूत्रों की माने तो सरकार अलगावादियों के सामने नरम नहीं पडना चाहती है और अपनी शर्तों पर बात करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि अलगाववादी भारत सरकार के साथ बातचीत में पाकिस्तान को भी शामिल करना चाहते हैं जबकि केंद्र सरकार को इसे लेकर कड़ा एतराज है। इसलिए सरकार ने अलगाववादियों पर शिकंजा कस दिया है। ताकि वे अपनी शर्तों पर नहीं बल्कि सरकार की शर्तों को मानते हुए उनको बातचीत की टेबल पर आएं। हालांकि गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार अभी इसे लेकर किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। गृहमंत्री राजनाथ ने अपने हाल में कश्मीर दौरे पर अलगाववादियों समेत सभी पक्षकारों से बात करने की इच्छा जताई थी। मगर उसके बाद भी अलगाववादी नेताओं पर सीमा पार से हो रही कथित फंडिंग को लेकर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।
दबाव महसूस कर रहे अलगाववादी
अलगाववादी नेता मीरवाइ उमर फारूख ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह की बात का तुरंत स्वागत किया था। मगर इसके जवाब में सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसके उलट सरकार का रुख अलगाववादियों के खिलाफ लगातार सख्त हो रहा है। अलगाववादी नेता शब्बीर शाह पुलिस की हिरासत में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग मामले जम्मू कश्मीर के निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। साथ ही सैयद अली शाह जैसे बड़े अलगाववादी नेताओं की गतिविधियों पर भी लगाम कसी है, ताकि वह लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं कर सकें।
अलगावादियों के अलावा आतंकवादियों के खिलाफ सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के ऑपरेशन ऑल आलआउट को बड़ी सफलता मिली है। थोड़े ही समय में कश्मीर में सक्रिय 150 आतंकवादियों को मार गिराया है। सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि कश्मीर में अभी सिर्फ 100 से 102 आतंकवादी बचे हैं। सीमा पार से घुसपैठ पर काफी हद तक लगाम लगा दी गई है। सीमा पार पर देखते ही गोली मारने के आदेश है। लश्कर जैसे आतंकवादी संगठन स्थानीय स्तर पर नए आतंकवादी भती नही कर पा रहे हैं। साथ ही विकास कार्यों में तेजी लाने और युवाओं को रोजगार के सिलसिले में तेजी लाकर लोगों का विश्वास जीता जा रहा है। सेना ने भी लोगों से सीधा संपर्क बनाने के लिए मिलने जुलने के कई तरह के कार्यक्रम शुरू किए हैं।
मामले में एयर वाइस मार्शल रिटायर्ड कपिल काक का कहना है कि कश्मीर मुद्दे का हल बातचीत के जरिए ही निकलेगा। सरकार को जल्द से जल्द सभी पक्षकारों से बातचीत करनी चाहिए। सिर्फ अलगाववादी नहीं बल्कि पाकिस्तान से भी बातचीत करनी चाहिए। पाकिस्तान को सरकार चाह कर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहती।
Published on:
30 Sept 2017 09:36 pm
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