25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजीब इंसान हैं अटल बिहारी, 65 साल पहले मुंबई चले गए फटा कुर्ता पहनकर जनसंघ की सभा में भाषण देने

अटल उस जिंदादिल इंसान का नाम है जो प्रतिकूलता से घबराते नहीं है और उसका तत्‍काल डटकर सामना करने को विश्‍वास रखते हैं।

2 min read
Google source verification
atal

अजीब इंसान थे अटल बिहारी, 65 साल पहले मुंबई चले गए फटा कुर्ता पहनकर जनसंघ की सभा में भाषण देने

नई दिल्‍ली। एक तरफ पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी एम्‍स में मौत से जंग लड़ रहे हैं। वहीं देश भर के लोग ईश्‍वर से उनकी की बेहतरी की दुआएं मांग रहे हैं। इसके अलावा एक पहलू उनकी जिंदगी और मौत का ये भी है कि एम्‍स से बाहर मीडिया जगत में उनकी जिंदगी के अनछुए पहलुओं को लोग परत-दर-परत उधेड़ने का काम जारी है। ये उनकी जिंदगी की वो परतें हैं जिसके बारे में जानकार सभी को आश्‍चर्य होगा कि क्‍या इतना जिंदादिल और अपने लक्ष्‍य को लेकर प्रतिबद्ध थे अटलजी। इन्‍हीं अजीब पहलुओं में से एक पहलु ये भी है कि 65 साल पहले वो संघ के एक वरिष्‍ठ पदाधिकारी के कहने पर दिल्‍ली से जनसंघ की सभा को संबोधित करने मुंबई के लिए रवाना हो गए थे। इस बात की चिंता किए बगैर कि जो कुर्ता उन्‍होंने पहन रखा है वो भी फटा है और उनके बैग में जो एक और कुर्ता है वो भी वैसा ही है।

अनाम किस्‍से
दरअसल, ये बात उन दिनों की है जब अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति की शुरुआत कर ही रहे थे। 1953 में उन्हें मुंबई में जनसंघ की एक जनसभा को संबोधित करना था। जब वे सभा के लिए तैयार हुए तो देखा कि जो कुर्ता उन्होंने पहना है वह आस्तीन के पास से फटा हुआ था। उन्होंने अपना दूसरा कुर्ता निकाला लेकिन वह भी गले के पास फटा हुआ निकला। वाजपेयी बस दो ही कुर्ते लेकर बंबई गए थे और वे दोनों के दोनों फटे हुए थे। अब कोई रास्ता नहीं था। लेकिन अटल जी की त्वरित बुद्धि ने वहां काम किया उन्होंने फटे हुए कुर्तों में से एक के ऊपर जैकेट पहन ली। इसके बाद सभा में फटे कुर्ते के बारे में किसी को पता तक नहीं चला। यहां तक कि मुम्‍बई पहुंचने के बाद जिनके यहां वो रुके उन्‍हें भी नहीं। जबकि उन्‍होंने अटल से पूछा था कि आप अचानक मुंबई आ गए हैं कल क्‍या पहनकर जनसभा को संबोधित करेंगे। इस उन्‍होंने कहा कि जनसभा को संबोधित करने आया हूं। आप चिंता न करें। आपको बता दें उस सभा जब अटल पहुंचे तो चंद मिनटों में उनका भाषण सुनकर लोग तालियां बजाने लगे और अटल की जिंदाबाद नारों से सभास्‍थल गूंज उठा। यही कारण है कि अटल एक जिंदादिल इंसान थे। वो प्रतिकूलता से घबराते नहीं थे और उसका तत्‍काल सामना करने को तैयार रहते थे।

हमारे अटल पुस्‍तक में भी है इस बात की चर्चा
आपको बता दें कि 2014 में भाजपा के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष और राज्‍यसभा सांसद प्रभात झा की एक पुस्‍तक प्रकाशित हुई थी। उन्‍होंने पुस्‍तक का नाम हमारे अटल ही है। अपने पुस्‍तक में उन्‍होंने अटल जी के करीबियों के पत्रों का शामिल किया है। पुस्‍तक में उन पत्रों को शामिल किया गया जो अटल के जीवन से जुड़े हैं और उनके करीबी ही इस बात को जानते हैं। पुस्‍तक में उन्‍होंने अटल जी के नजदीकियों के एक पत्र का हवाला देते हुए इस पूरी कहानी का जिक्र किया है। उस पुस्‍तक में साफ उल्‍लेख है कि एक दिन पहले अटल जी ने कैसे दिल्‍ली में जनसभा को संबोधित किया था और दूसरे ही दिन कैसेट मुंबई पहुंचे और संघ की जनसभा को संबोतिधत किया।