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Silkyara Tunnel : सिल्क्यारा सुरंग के बेहद जटिल मिशन को इन्होंने अंजाम तक पहुंचाया

-सुरंग बचाव अभियान : आशा और निराशा के बीच मोर्चे पर डटे रहे

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Silkyara Tunnel : सिल्क्यारा सुरंग के बेहद जटिल मिशन को इन्होंने अंजाम तक पहुंचाया

बचाव दल को जरूरी दिशा निर्देश देते अर्नोल्ड डिक्स।

नई दिल्ली. उत्तराखंड सुरंग बचाव अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राज्य और केंद्रीय एजेंसियां, सेना और रेट माइनर्स की भूमिका रही। लेकिन कुछ लोगों के योगदान ने इस मिशन को कामयाब बनाया। जानिए इनके बारे में-

क्रिस कूपर : माइक्रो-टनलिंग विशेषज्ञ
क्रिस कूपर दशकों से एक माइक्रो-टनलिंग विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहे हैं। इन्हें खास तौर पर इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया है। कूपर चार्टर्ड इंजीनियर हैं, जो सिविल इंजीनियरिंग बुनियादी ढांचे, मेट्रो सुरंगों, बड़ी गुफाओं, बांध और रेलवे के लिए खनन में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका यही अनुभव मिशन के लिए दिशा देने वाला रहा। वह ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार भी हैं।

अर्नोल्ड डिक्स : सुरंग निर्माण विशेषज्ञ
वैज्ञानिक शोधकर्ता और भूमिगत सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने में महत्वपूर्व भूमिका निभाई है। डिक्स 20 नवंबर को सुरंग स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने पिछले 7 दिनों में सभी को पॉजिटिव रहने की सलाह दी। डिक्स भूमिगत निर्माण से जुड़े जोखिमों से बचाने में मदद करते हैं। सुरंग बनाने में दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञों में से एक हैं।

अता हसनैन : सदस्य, एनडीआरएफ
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल और एनडीआरएफ टीम के सदस्य सैयद अता हसनैन उत्तराखंड सुरंग दुर्घटना में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका की देखरेख कर रहे हैं। हसनैन पूर्व में श्रीनगर में तैनात भारतीय सेना की जीओसी 15 कोर के सदस्य थे। इस रेस्क्यू अभियान में इनकी भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है।

नीरज खैरवाल : नोडल अधिकारी
आइएएस अधिकारी नीरज खैरवाल को सुरंग हादसे के बाद नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था और वह पिछले 10 दिनों से बचाव कार्यों की देखरेख और कमान संभाल रहे हैं। खैरवाल हर घंटे सीएमओ और पीएमओ को रेस्क्यू अभियान का अपडेट देते रहे। वह उत्तराखंड सरकार में सचिव भी हैं।

खनन विशेषज्ञों की टीम
माइक्रो-टनलिंग, मैन्युअल ड्रिलिंग और फंसे हुए श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए मध्यप्रदेश से छह रैट खनन विशेषज्ञों को बुलाया गया है। इन लोगों ने मजदूरों के निकालने के लिए बिछाई गई संकीर्ण 800 मिमी पाइप की निगरानी की है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय ड्रिलिंग विशेषज्ञ, पर्यावरण विशेषज्ञ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के सदस्यों के साथ-साथ भारतीय सेना को भी यहां तैनात किया गया है।