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नागरिकता कानून पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, अगली सुनवाई 22 को

देश भर में हो रहा है एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन याचिकाएं दायर करने वालों में कई नेता भी शामिल संविधान की मूल भावना का उल्लंधन करता है एक्ट

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नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। याचिकाओं पर अगली सुनवाई अब 22 जनवरी को होगी। बता दें, इन याचिकाओं में नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लाए गए इस एक्ट को संविधान विरोधी बताया गया है। याचिकाकर्ताओं में कई राजनेता, एनजीओ और वरिष्ठ वकील शामिल हैं।

याचिका दायर करने वालों में कई नेता भी शामिल

नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के खिलाफ दायर की गई याचिकाएं चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने लंबित हैं। बेंच ने सभी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई की बात कही थी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता जयराम रमेश, त्रिपुरा के शाही परिवार के सदस्य प्रद्योत किशोर देब बर्मन, असदुद्दीन ओवैसी, महुआ मोइत्रा, पीस पार्टी, एम एल शर्मा समेत कई याचिकाकर्ता शामिल हैं।

याचिकाओं में एक्ट को बताया असंवैधानिक

बता दें, इन लोगों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं ज्यादातर याचिकाओं में नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट को असंवैधानिक करार दिया गया है। इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि ये कानून संविधान के आर्टिकल 14, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। इससे भारत की मूल भावना का भी उल्लंघन होता है।

पूरे देश में विरोध प्रदर्शन

गौर हो, देश के कई हिस्सों में सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पहले पूर्वोत्तर में लोग इस कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे। उसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे। दिल्ली के जामिया इलाके में विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप धारण कर गया। इसमें 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को दिल्ली के ही सीलमपुर इलाके में विरोध प्रदर्शन के दौरान आगजनी और पत्थरबाजी हुई।


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